
Vastu Tips for Stairs: घर बनाते समय हम मुख्य दरवाजे, रसोई और कमरों की दिशा का तो ध्यान रखते हैं, लेकिन सीढ़ियों से जुड़ी कुछ बातों पर अक्सर ध्यान नहीं जाता. वास्तु विशेषज्ञ बाबा बिमलेश के अनुसार, वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों की संख्या, उनकी जगह और दिशा को भी खास महत्व दिया जाता है. सीढ़ियों की संख्या को लेकर वास्तु में इंद्र-यम-राज का एक नियम बताया गया है, जिसके आधार पर कुछ संख्याओं को शुभ माना जाता है. अगर आप भी घर में सीढ़ियां बनवा रहे हैं या पहले से बनी सीढ़ियों को लेकर वास्तु की मान्यताओं को जानना चाहते हैं, तो 5, 8 और 11 जैसी संख्याओं से जुड़े इस नियम को समझ सकते हैं. हालांकि सीढ़ियों की बनावट तय करते समय घर की जगह, मंजिल की ऊंचाई और आने-जाने की सुविधा का ध्यान रखना भी जरूरी है.
क्या है इंद्र-यम-राज का नियम ?
वास्तु की मान्यता के अनुसार सीढ़ियों की संख्या को 3 से भाग देकर उसका शेष देखा जाता है. अगर भाग देने के बाद शेष 2 आता है, तो ऐसी संख्या को अनुकूल माना जाता है. इस हिसाब से 5, 8, 11, 14, 17, 20, 23, 26 और 29 जैसी संख्याएं सामने आती हैं. इसे ही इंद्र-यम-राज के क्रम से जोड़कर देखा जाता है.
5, 8 या 11 में से कौन सी संख्या मानी जाती है शुभ
अगर आप घर में सीढ़ियों की संख्या को वास्तु की इस मान्यता के हिसाब से रखना चाहते हैं, तो 5, 8 और 11 जैसी संख्या चुनी जा सकती है.
मिसाल के तौर पर 8 को 3 से भाग देने पर शेष 2 आता है. इसी तरह 11 और 14 को 3 से भाग देने पर भी शेष 2 ही बचता है. इसी वजह से इन संख्याओं को वास्तु में अनुकूल माना जाता है.
सीढ़ियां गिनते समय यहां न हो जाए गलती
सीढ़ियां गिनते समय सिर्फ ऊपर दिखने वाले पायदान गिनना ही काफी नहीं होता. सीढ़ी के एक पायदान से दूसरे पायदान के बीच के खड़े हिस्से को राइजर कहा जाता है. वास्तु की इस गिनती में इसे भी ध्यान में रखा जाता है.
ऊपर की मंजिल तक पहुंचने वाला आखिरी हिस्सा भी गिनती में आ सकता है. इसलिए सीढ़ियों की संख्या तय करने से पहले इंजीनियर से इसकी सही गिनती समझ लेना बेहतर है.
20 सीढ़ियों को लेकर क्या कहा जाता है
वास्तु की कुछ मान्यताओं में 10 और 20 जैसी गिनती को शुभ नहीं माना जाता. इसकी वजह इन संख्याओं के आखिर में आने वाला 0 बताया जाता है. हालांकि वास्तु को लेकर अलग-अलग जगहों पर अलग मान्यताएं देखने को मिलती हैं. इसलिए सिर्फ सीढ़ियों की गिनती के लिए घर की पूरी बनावट बदलने की जरूरत नहीं है.
सीढ़ियों की दिशा पर भी दें ध्यान
वास्तु में सिर्फ सीढ़ियों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी जगह और दिशा को भी देखा जाता है. घर के किस हिस्से में सीढ़ियां बनी हैं और ऊपर जाते समय उनका रास्ता किस ओर बढ़ रहा है, इसे भी वास्तु से जोड़कर देखा जाता है. अगर नया घर बनवा रहे हैं तो सीढ़ियों की जगह पहले से तय करना बेहतर रहता है, ताकि बाद में कमरे या रास्ते में बदलाव न करना पड़े.
सीढ़ियों की चौड़ाई और ऊंचाई भी है जरूरी
सीढ़ियां कितनी चौड़ी हैं और हर पायदान की ऊंचाई कितनी है, इन बातों का सीधा संबंध घर की सुविधा और सुरक्षा से है. सीढ़ियां बहुत ऊंची या बहुत संकरी होने पर ऊपर-नीचे आने-जाने में परेशानी हो सकती है.
इसलिए वास्तु की मान्यता के साथ सीढ़ियों का सही आकार और मजबूत रेलिंग जैसी जरूरी चीजों का भी ध्यान रखें.
सिर्फ वास्तु के लिए डिजाइन से न करें समझौता
घर बनवाते समय पहले यह देखें कि सीढ़ियों के लिए कितनी जगह है और मंजिल की ऊंचाई कितनी है. इसके बाद वास्तु की मान्यता के हिसाब से 5, 8, 11 या दूसरी संख्या का विकल्प देखा जा सकता है.
सिर्फ शुभ संख्या रखने के लिए सीढ़ियों को बहुत ऊंचा या छोटा बनाना ठीक नहीं है. सीढ़ियां ऐसी हों जो घर की जगह में आसानी से फिट हों और रोज इस्तेमाल करने में भी आरामदायक रहें.
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