केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स इन दिनों 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का बड़ी ही बेसब्री से इंताजर कर रहे हैं. इसी बीच इन सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों ने एक बड़ी मांग आयोग के सामने रख दी है. ये मांग है OROP यानी वन रैंक, वन पेंशन की.
कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि समान पद और समान सर्विस पीरियड से रिटायर हुए सभी कर्मचारियों को, चाहे वो किसी भी साल रिटायर हुए हों, लगभग समान पेंशन मिले.
क्या है ‘वन रैंक, वन पेंशन’?
दरअसल वन रैंक, वन पेंशन (OROP) एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें एक ही पद या लेवल पर समान अवधि की नौकरी करने वाले कर्मचारियों को लगभग एक जैसी पेंशन दी जाती है. इसमें ये नहीं देखा जाता कि कर्मचारी किस साल रिटायर हुआ था. OROP का उद्देश्य इसी तरह की पेंशन में असमानता को खत्म करना है.
कर्मचारी संगठन क्या बोले?
हाल ही में इस व्यवस्था को लेकर ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) के महासचिव सी श्रीकुमार ने ईटी वेल्थ ऑनलाइन के साथ बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने OROP को लेकर कहा कि, ‘वन रैंक, वन पेंशन लागू होने से एक ही पद से अलग-अलग समय पर रिटायर हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पेंशन में अंतर खत्म हो सकता है.’
तो वहीं ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने भी इस मुद्दे को लेकर ईटी वेल्थ ऑनलाइन के साथ बातचीत में कहा कि, ‘पुराने पेंशनरों को समय-समय पर वेतन आयोग के जरिए पेंशन में बढ़ोतरी का लाभ मिलने के बावजूद, अलग-अलग पेंशनरों की पेंशन में काफी अंतर है.
पिछले वेतन आयोग में भी हुई थी कोशिश?
इससे पहले भी पिछले वेतन आयोगों में इस अंतर को कम करने की कोशिश की गई है. 5वें वेतन आयोग ने 1986 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन को उस समय के नए वेतनमान के हिसाब से दोबारा तय करने की सिफारिश की थी. इसके तहत पेंशन को एक तय तरीके से ‘नॉशनल पे फिक्सेशन’ यानी कागज पर नए वेतन के हिसाब से दोबारा गणना करने की बात कही गई थी.
इसके अलावा 7वें वेतन आयोग ने भी माना था कि पुराने और नए पेंशनरों के बीच अंतर धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए. आयोग ने पुराने पेंशनरों और उस समय रिटायर होने वाले कर्मचारियों के बीच समानता लाने के लिए पेंशन की नई गणना का तरीका सुझाया था.
बता दें कि फिलहाल की व्यवस्था के अनुसार सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए OROP लागू नहीं है. फिलहाल ये मुख्य रूप से सशस्त्र बलों और कुछ अन्य श्रेणियों पर लागू है. 8वें वेतन आयोग में इसे सभी केंद्रीय सरकारी सिविल कर्मचारियों तक बढ़ाने की मांग की जा रही है.
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