चांदनी चौक के कूचा महाजनी में ज्वैलरी की 54 दुकानों पर सील लगने के बाद बाजार में कारोबार की रफ्तार थम गई है। जिन दुकानों में दिनभर ग्राहकों और कारोबारियों की आवाजाही रहती थी, वहां अब शटर पर लगी सील नजर आ रही है। दुकानें बंद होने से व्यापारी बाहर खड़े रहते हैं, जबकि सोना-चांदी, तैयार आभूषण और नकदी अंदर ही बंद हैं। व्यापारियों के मुताबिक, कई दुकानों में करोड़ों रुपये का माल रखा है, जिस तक उनकी पहुंच नहीं है।
व्यापारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है और इसके बाद शादी का सीजन भी आने वाला है। इस दौरान आभूषणों की मांग बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन दुकानें बंद होने से न नए ऑर्डर लिए जा रहे हैं और न ही पुराने ऑर्डर की डिलीवरी हो पा रही है।
ग्राहकों के लगातार फोन आने से व्यापारियों की परेशानी और बढ़ रही है। कारोबारियों का कहना है कि दुकानें बंद होने का असर करीब 280 कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी पड़ रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कर्मचारियों और उनसे जुड़े परिवारों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
ग्राहकों के ऑर्डर अटके, परिवारों के खर्च की चिंता
दुकानों से व्यापारी ही नहीं, बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार जुड़े हैं। त्योहारी सीजन में कारोबार बंद होने से चिंता बढ़ी है। संबंधित पक्षों के बीच बातचीत से जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि दुकानदारों को अपनी दुकानों तक पहुंच मिले और कारोबार सामान्य हो सके।
– योगेश सिंघल, अध्यक्ष, ऑल बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन, कूचा महाजनी, चांदनी चौक
दुकान पर ताला लगा है और अंदर हमारा माल बंद है। त्योहारी सीजन में कारोबार बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन सीलिंग की वजह से यह सीजन तो खराब हो ही गया। बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहा हूं।
-आशीष जैन, ज्वैलर
दुकानें बंद होने से ग्राहकों के ऑर्डर और डिलीवरी भी रुक गई है। कुछ ग्राहकों ने त्योहार और शादी के लिए आभूषण बुक कराए हैं, लेकिन तैयार सामान दुकानों के अंदर सील हो गया है। अब ग्राहकों के लगातार फोन आ रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि कैसे डिलीवरी दी जाए।
– प्रदीप खंडेलवाल, ज्वैलर
हमारे कर्मचारी वर्षों से हमारे साथ काम कर रहे हैं। उनके घर का खर्च इसी रोजगार से चलता है। दुकान बंद होने का असर अब सिर्फ व्यापारी तक सीमित नहीं है, हमसे जुड़े परिवारों पर भी पड़ रहा है। -अनिल जैन, ज्वैलर
