ओडिशा में पिछले कई दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते हालात बिगड़ गए हैं। राज्य की लगभग सभी नदियां उफान पर हैं। निचले इलाकों में रहने वाले 70 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और उनके लिए 395 राहत शिविर बनाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के 13 जिलों में अचानक आई बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी रविवार सुबह दक्षिण ओडिशा के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। वहीं, हीराकुंड बांध के 16 गेट खोले जा चुके हैं, जबकि ODRAF, NDRF और फायर सर्विस की टीमें राहत-बचाव में जुटी हैं।


13 जिलों में बाढ़ और जलभराव
बारिश से बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, कालाहांडी, कोरापुट, नबरंगपुर, मलकानगिरी, क्योंझर, नयागढ़, कंधमाल, बोलांगीर और जगतसिंहपुर में फ्लैश फ्लड और जलभराव की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन लगातार प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।
बालासोर में तीन बड़ी नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बालासोर सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है। यहां तीन प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। शाम 5 बजे जलेश्वर के राजघाट पर सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर 11.07 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 10.36 मीटर है। नदी के बढ़े जलस्तर से भोगराई, जलेश्वर, बालियापाल और बस्ता ब्लॉक के कई गांवों में पानी घुस गया है।
NH-16 के पास भी बढ़ा पानी
बुधबलंग नदी भी उफान पर है। दोपहर 3 बजे गोविंदपुर में NH-16 के ऊपर नदी का जलस्तर 8.8 मीटर दर्ज किया गया। बालासोर में कंसाबांसा, सोआ और गंगाहर जैसी नदियों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है।
देवकुंड में पर्यटकों की एंट्री पर रोक
मयूरभंज में भारी बारिश के बाद सिमिलिपाल नेशनल पार्क प्रशासन ने पर्यटकों के लिए देवकुंड को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया है। अधिकारियों ने लोगों से फिलहाल इस इलाके में जाने से बचने की अपील की है। बारिश के कारण कई झरनों और जलधाराओं में पानी तेजी से बढ़ गया है।
पुल और पुलिया क्षतिग्रस्त, कई इलाकों में पानी
देवकुंड जाने वाले रास्ते में कई पुल और पुलिया बह गए हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। इससे यहां पहुंचने में भी परेशानी हो रही है। उधर, बुधबलंग नदी का पानी बारिपदा नगरपालिका के कुछ हिस्सों के साथ-साथ बड़साही, बेटनटी, उदला, कप्तिपदा, सारस्काना और रसगोबिंदपुर ब्लॉक तक पहुंच गया है।
हीराकुंड बांध के 16 गेट खोले गए
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि हीराकुंड बांध से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए शनिवार को 11 और गेट खोलने पड़े। अब तक बांध के कुल 16 स्लुइस गेट खोले जा चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, महानदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश के कारण बांध में पानी लगातार बढ़ रहा है।
निचले इलाकों में रहने वालों को अलर्ट
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल जलस्तर 629.56 फीट है, जबकि बांध का पूर्ण जलाशय स्तर 530 फीट बताया गया है। बाढ़ के मैदानों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।
33 ODRAF और 3 NDRF टीमें राहत में जुटीं
मंत्री के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के लिए ODRAF की 33 टीमें, NDRF की 3 टीमें और फायर सर्विस के करीब 300 दल लगाए गए हैं। प्रशासन का फोकस प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने पर है।
जाजपुर में कानी नदी का पानी गांवों में घुसा
जाजपुर जिले में बैतरणी नदी की शाखा कानी नदी के उफान पर आने से दशरथपुर ब्लॉक की तारापद और कपासी पंचायतें जलमग्न हो गई हैं। लगातार बढ़ते पानी से स्थानीय लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कालाहांडी में इंद्रावती परियोजना के पांच गेट खुले
कालाहांडी जिले में हाती नदी पर बनी इंद्रावती परियोजना के पांच गेट खोल दिए गए हैं। गुरुवार रात से यहां से 550 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते जिले के कई ब्लॉकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है।
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कोरापुट में 100 से ज्यादा घरों को नुकसान
कोरापुट जिले के कोटपाड़ ब्लॉक की पांच पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। यहां 100 से ज्यादा घरों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चला रहा है।
