8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि नई सैलरी कितनी बढ़ सकती है. हाल ही में एक आंकड़ा सामने आया है कि लेवल 8 के कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी 1.52 लाख रुपए महीना तक पहुंच सकती है. अब लोग ये जानने के लिए परेशान हैं कि क्या सचमें सैलरी 1.52 लाख प्रति महीना होने वाली है.
दरअसल, ये आंकड़ा अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस और परिवहन भत्ता को जोड़कर निकाले गए एक अनुमान पर है. 8वें वेतन आयोग ने अभी न तो फिटमेंट फैक्टर तय किया है और न ही नई सैलरी का कोई फॉर्मूला तय किया है.
1.52 लाख कहां से आया?
सैलरी कैलकुलेशन के मुताबिक 8वें वेतन आयोग में अगर 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है और उस समय महंगाई भत्ता करीब 66% तक पहुंच जाता है, तो लेवल 8 के कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी 1.51 से 1.52 लाख रुपए महीना तक हो सकती है.
7वें वेतन आयोग में क्या हुआ था?
फिटमेंट फैक्टर से पुरानी बेसिक सैलरी को नई बेसिक सैलरी में बदला जाता है. जैसे 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ था, जिसमें कर्मचारियों की बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा करके नया बेसिक तय किया गया था. हालांकि, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा ये अभी तय नहीं हुआ है.
बेसिक और ग्रॉस सैलरी में क्या फर्क होता है?
कई लोगों को लगता है कि अगर बेसिक सैलरी 2.57 गुना हो गई तो पूरी सैलरी ही बढ़ जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं है. ग्रॉस सैलरी में सिर्फ बेसिक नहीं, बल्कि महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस और परिवहन भत्ता भी शामिल होता है.
यही कारण है कि पिछली बार 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर होने के बावजूद औसतन ग्रॉस सैलरी 14% बढ़ा था. तब समय महंगाई भत्ता भी काफी ज्यादा था.
कितना होगा महंगाई भत्ता?
केंद्रीय कर्मचारियों को अभी 60% महंगाई भत्ता मिल रहा है. अगर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2027 के दूसरे हिस्से में लागू होती हैं, तो महंगाई भत्ता करीब 66% तक पहुंच जाएगा. बस इसी बेसिस पर कैलकुलेशन की जा रही है. यानी महंगाई भत्ता जितना ज्यादा होगा, नई सैलरी का हिसाब- किताब भी उतना ही बदलेगा.
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