बिहार में बाढ़ और सूखे की स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। पटना के 1, पोलो रोड स्थित आवास पर रविवार को संवाददाता सम्मेलन में तेजस्वी ने कहा कि बिहार पिछले 28 दिनों से बाढ़ की विभीषिका के साथ-साथ सूखे की मार भी झेल रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 35 फीसदी से कम बारिश हुई है और भीषण सूखे के कारण लाखों हेक्टेयर में खड़ी फसलें नष्ट हो रही हैं। तेजस्वी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बिहार से होने का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी इतनी भी हैसियत नहीं है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से बाढ़ प्रभावित बिहार का दौरा करने का आग्रह कर सकें। उन्होंने कहा कि बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री है, राज्य से आठ केंद्रीय मंत्री और एनडीए के 42 सांसद हैं। इसके बावजूद बाढ़ पीड़ितों को अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे जनप्रतिनिधियों को अब जरूर सबक सिखाएगी।
50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित, राहत शिविर बंद करने का आरोप
तेजस्वी ने कहा कि एक ओर बिहार विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में सूखे की स्थिति भयावह है। उनके अनुसार, राज्य में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, लेकिन सरकार बाढ़ पीड़ितों की सुध नहीं ले रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर शुरू किए गए सामुदायिक रसोई और राहत शिविर फंड के अभाव में दो-चार दिनों में ही बंद कर दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन गरीबों के मकान गिर गए, जिनके घरों में पानी भर गया और जिनके जूते-चप्पल, कपड़े तथा बर्तन पानी में बह गए, वे राहत शिविर बंद होने के बाद कहां जाएंगे। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बाढ़ पीड़ितों से आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिससे राहत पहुंचाने में परेशानी हो रही है।
आकस्मिक निधि को लेकर सरकार से पूछा हिसाब
तेजस्वी ने कहा कि बिहार के खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला हक है। उन्होंने दावा किया कि 2015 और 2022 में महागठबंधन सरकार के दौरान आपदा प्रबंधन और वित्त विभाग राजद के पास था। उस समय लालू प्रसाद की सलाह पर बजट में बाढ़, सूखा और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों के लिए राज्य के कुल बजट की चार फीसदी राशि आकस्मिक निधि के रूप में इस्तेमाल करने का प्रावधान कराया गया था। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बजट के हिसाब से बिहार की आकस्मिक निधि कितनी होगी और वह राशि कहां गई। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि जून में ही आकस्मिक निधि निकाल ली गई और अब बाढ़ पीड़ितों के लिए निधि का अभाव बताया जा रहा है।
डेढ़ लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद होने का दावा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बाढ़ के कारण करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में धान, मक्का, सब्जी और केले की फसल बर्बाद हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों को क्षतिग्रस्त फसल का कोई मुआवजा नहीं मिला है। साथ ही सूखे से प्रभावित किसानों की स्थिति का भी सरकार ने अभी आकलन नहीं किया है। उन्होंने बाढ़ और सूखे से प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण कराकर जल्द मुआवजा देने की मांग की।
शिवराज सिंह चौहान के दौरे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
तेजस्वी ने कहा कि उनके पत्र लिखने और लगातार बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठाने के बाद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार भेजा गया। उन्होंने सवाल किया कि चौहान के दौरे पर क्या रिपोर्ट तैयार हुई? उन्होंने राहत, पुनर्वास और नुकसान के आकलन से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
पीएम केयर्स फंड से बिहार को मदद नहीं मिलने पर सवाल
तेजस्वी ने प्रधानमंत्री राहत कोष और पीएम केयर्स फंड को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि बाढ़ प्रभावित बिहार की मदद पीएम केयर्स फंड से क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि गोवा, अरुणाचल प्रदेश सहित कई राज्यों की कुल आबादी से अधिक लोग बिहार में बाढ़ से प्रभावित हैं, फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार की कोई सुध नहीं ली। तेजस्वी ने इसे बिहार के साथ भेदभाव का सवाल बताया।
‘100 करोड़ के दीये जलाए गए’, 15 हजार ही मुआवजा दे दीजिए
तेजस्वी ने बिहार में बाढ़ के बीच 100 करोड़ रुपये के दीये जलाए जाने का आरोप लगाते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के बजाय सरकार ध्यान भटकाने वाले कार्यक्रम कर रही है। जनप्रतिनिधियों की ओर से अपनी एक-दो महीने की सैलरी देने की प्रतीकात्मक पहल पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इससे कुल मिलाकर दो-तीन करोड़ रुपये भी जमा नहीं होंगे, जबकि करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। तेजस्वी यादव ने सरकार से बाढ़ पीड़ित परिवारों को अविलंब 15 हजार रुपये की सहायता देने की मांग की। साथ ही उन्होंने बाढ़ और सूखे से प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण कराकर उन्हें जल्द से जल्द मुआवजा देने की मांग की।


