यूपीआई के जरिये 2000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने का चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। कारोबारी संगठनों ने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि फैसला वापस नहीं होगा।
वहीं, बुधवार को टैक्स विशेषज्ञों ने यह खुलासा भी किया कि व्यापारियों को 0.4 फीसदी एमडीआर पर 18 फीसदी जीएसटी भी देना होगा। हालांकि, इसके बदले वे इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर पाएंगे जिससे उनका कुल टैक्स बोझ कम हो जाएगा। एनपीसीआई ने मंगलवार को यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क की घोषणा की थी जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है। यह 15 अक्तूबर से लागू होगा।
एमडीआर को वापस नहीं लेगी केंद्र सरकार
सरकारी सूत्रों ने कहा, एमडीआर को वापस नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब पूछा गया कि क्या सरकार एमडीआर को वापस लेने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने कहा, फैसला लिया जा चुका है और इसे पलटने का सवाल नहीं है। अधिकारी ने कहा, संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति ने 32वीं रिपोर्ट में चेतावनी दी कि शून्य एमडीआर व्यवस्था सरकारी खजाने पर दबाव डालती है और इन्फ्रा में निवेश की क्षमता को सीमित करती है। इसलिए एक टिकाऊ राजस्व व्यवस्था बनाना जरूरी है।
इन श्रेणियों में 5 रुपये एमडीआर
रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस व फ्यूल जैसी खास श्रेणियों के कारोबारियों के लिए 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर भी सिर्फ 5 रुपये का रियायती एमडीआर रेट लागू होगा। स्कूल फीस भुगतान भी 2000 से ज्यादा होने पर सिर्फ 5 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन एमडीआर लागू होगा।
एमडीआर लागू करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
यूपीआई से 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर एमडीआर लगाने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता ने दाखिल की है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि नई व्यवस्था मनमानी व भेदभावपूर्ण है और इससे देश में कारोबारियों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।
पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने वित्त मंत्रालय को भेजा पत्र
एमडीआर के खिलाफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर इस फैसले से पेट्रोल पंपों को बाहर रखने की मांग की है। यह स्थिति तब है जबकि पेट्रोप पंपों पर 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रति ट्रांजेक्शन सिर्फ 5 रुपये शुल्क लगाए जाने का फैसला लिया गया है।
मधुमक्खियों की तरह टैक्स जुटाए सरकार : लाहिड़ी
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने चाणक्य का जिक्र करते हुए कहा, नागरिकों से टैक्स वैसे ही वसूलना चाहिए जैसे मधुमक्खी फूल से शहद इकट्ठा करती है- धीरे-धीरे और बिना फूल की पंखुड़ियों को नुकसान पहुंचाए या तोड़े।
फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहीं : वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा, यूपीआई लेन-देन पर 0.4% एमडीआर के फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहीं है। मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट में कहा, कुछ दावों में कहा गया है कि यह बदलाव विदेशी असर की वजह से हुआ है। यह बात गलत है। भारत के नीतिगत फैसले आजादी से लिए जाते हैं।


