क्रिकेट का मैदान सिर्फ बल्ले और गेंद की लड़ाई नहीं होता। यहां दिमाग भी चलता है और कई बार जुबान भी बल्ले से कम तेज नहीं होती। खासकर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की बात हो तो स्लेजिंग का जिक्र होना तय है। कंगारू खिलाड़ी विरोधी बल्लेबाज पर दबाव बनाने के लिए मैदान पर लगातार तंज कसने और उकसाने के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन हर बार सामने वाला खिलाड़ी उनकी बातों में फंस जाए, ऐसा भी नहीं है।
क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई मौके आए, जब ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने सामने वाले को उकसाने की कोशिश की, लेकिन पलटकर ऐसा जवाब मिला कि उनकी ही बोलती बंद हो गई। इनमें कुछ किस्से तो इतने मजेदार हैं कि वर्षों बाद भी क्रिकेट प्रेमी उन्हें याद करके मुस्कुरा देते हैं। आइए ऐसे ही तीन चर्चित किस्सों पर नजर डालते हैं।

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क्रिकेट इतिहास के तीन मजेदार किस्से
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1. सहवाग ने क्लार्क से पूछा- तुम्हारा मालिक कौन है?
साल 2008 का एडिलेड टेस्ट। एक तरफ क्रीज पर भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर थे तो दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ी माइकल क्लार्क सिली पॉइंट पर खड़े थे। क्लार्क लगातार सचिन को परेशान करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने सचिन की उम्र को लेकर तंज कसा और कथित तौर पर कहा कि अब उन्हें क्रिकेट से संन्यास ले लेना चाहिए।
सचिन ने हमेशा की तरह अपना ध्यान बल्लेबाजी पर बनाए रखा। लेकिन नॉन-स्ट्राइकर छोर पर खड़े वीरेंद्र सहवाग से यह सब ज्यादा देर तक नहीं देखा गया। सहवाग ने क्लार्क से उनकी उम्र पूछी। क्लार्क ने बताया कि वह 23 साल के हैं। इसके बाद सहवाग ने सचिन की ओर इशारा करते हुए क्लार्क को उनकी उपलब्धियों याद दिलाते हुए कहा था कि जितनी तुम्हारी उम्र है, उससे ज्यादा ये शतक लगा चुके हैं।
इसके बावजूद क्लार्क अपनी बातें जारी रखे रहे। फिर सहवाग ने क्लार्क के पेट नेम ‘पप’ (Pup) को लेकर मजाक किया। सहवाग ने क्लार्क से पूछा कि उनके टीम मेट उन्हें ‘पप’ नाम से बुलाते हैं न? क्लार्क की सहमति मिलने पर सहवाग ने उसे पेट से जोड़ते हुए पूछ दिया था कि उनका ब्रीडर यानी मालिक कौन है? मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों के लिए यह जवाब अचानक आया ऐसा तंज था, जिसे सुनकर माहौल हल्का हो गया। क्लार्क को भी इस पल का जवाब देना मुश्किल पड़ा। सहवाग की खासियत ही यही थी, वह स्लेजिंग का जवाब अक्सर उसी भाषा में देते थे, लेकिन अपने अंदाज में।

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2. मार्क वॉ ने नए बल्लेबाज को घेरा, ऑरमंड ने पलट दिया पासा
दूसरा किस्सा 2001 की एशेज सीरीज से जुड़ा है। इंग्लैंड के जेम्स ऑरमंड पहली बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बल्लेबाजी करने उतरे थे। सामने थे ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी खिलाड़ी मार्क वॉ, जो स्लिप में खड़े थे। मार्क वॉ ने ऑरमंड को दबाव में लेने की कोशिश करते हुए उनकी क्षमता पर सवाल उठाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘तुम यहां क्या कर रहे हो? तुम तो मुझे दुनिया के सबसे खराब क्रिकेटर लगते हो। तुम इंग्लैंड के लिए खेलने लायक ही नहीं हो।’ नए खिलाड़ी के लिए ऐसा सवाल दबाव बढ़ाने वाला हो सकता था, लेकिन ऑरमंड ने इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
उन्होंने पलटकर ऐसा जवाब दिया, जिसमें मार्क वॉ के जुड़वां भाई स्टीव वॉ का संदर्भ था। ऑरमंड ने जवाब देते हुए कहा, ‘शायद आप सही कह रहे हैं वॉ साहब, मैं भले ही अच्छा खिलाड़ी न हूं… लेकिन कम से कम मैं अपने परिवार का सबसे बेस्ट खिलाड़ी तो हूं!’ यह जवाब सीधे मार्क वॉ की सबसे संवेदनशील जगह पर लगा। उस दौर में स्टीव वॉ ऑस्ट्रेलियाई कप्तान और दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल थे। विकेट के पीछे खड़े एडम गिलक्रिस्ट भी इस जवाब पर अपनी हंसी नहीं रोक पाए। यानी जिस स्लेजिंग का मकसद बल्लेबाज को दबाव में लाना था, उसका निशाना खुद स्लिप में खड़ा खिलाड़ी बन गया।

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क्रिकेट इतिहास के तीन मजेदार किस्से
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3. शास्त्री से भिड़े व्हिटनी, मिला 12वें खिलाड़ी वाला जवाब
तीसरा किस्सा भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट की पुरानी और तीखी प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा है। यह घटना 1991-92 के ऑस्ट्रेलिया दौरे की बताई जाती है। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज माइक व्हिटनी उस मुकाबले में प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं थे और 12वें खिलाड़ी के रूप में मैदान पर आए थे। रवि शास्त्री ने एक शॉट खेला, गेंद फील्डिंग कर रहे व्हिटनी की तरफ गई। शास्त्री रन लेने की स्थिति में थे, लेकिन फील्डर को देखकर उन्होंने क्रीज में रुकना बेहतर समझा।
इसी दौरान व्हिटनी ने शास्त्री को धमकाने की कोशिश की और कहा, ‘क्रीज के अंदर ही रहो, वरना तुम्हारा सिर तोड़ दूंगा!’ शास्त्री भी जवाब देने में पीछे हटने वालों में से नहीं थे। उन्होंने तुरंत ऐसा जवाब दिया, जिसने पूरी स्थिति का रुख ही बदल दिया। शास्त्री ने कहा, ‘अगर तुम गेंदबाजी भी उतनी ही अच्छी कर लेते जितनी अच्छी बातें करते हो, तो आज मैदान पर 12वें खिलाड़ी बनकर पानी नहीं ढो रहे होते!’ यह जवाब व्हिटनी के लिए सीधे-सीधे उनकी भूमिका पर तंज था। मैदान पर धौंस जमाने की कोशिश कर रहे खिलाड़ी को उसी की स्थिति याद दिला दी गई।

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टीम इंडिया
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स्लेजिंग का असली मजा पलटवार में था
क्रिकेट में स्लेजिंग का मकसद सामने वाले का ध्यान भटकाना और दबाव बनाना होता है, लेकिन इन किस्सों में खास बात यह रही कि बातों का दबाव बनाने निकले खिलाड़ी खुद ही जवाब के घेरे में आ गए। सहवाग ने क्लार्क को उनके ही उपनाम से घेरा, ऑरमंड ने मार्क वॉ को उनके जुड़वां भाई की याद दिला दी और शास्त्री ने व्हिटनी को 12वें खिलाड़ी की भूमिका याद करा दी। तीनों किस्सों में एक बात समान थी, पहले वार ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की तरफ से हुआ, लेकिन आखिरी पंच सामने वाले ने मारा।

