जर्मनी की राजनीति में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है. कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी ‘ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ (AfD) ने पूर्वी राज्य सैक्सनी-एनहाल्ट के स्थानीय चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. पार्टी को लगभग 44% वोट मिले हैं जो 1945 के बाद से जर्मनी के किसी भी राज्य में किसी दक्षिणपंथी दल का सबसे मजबूत चुनावी प्रदर्शन है.
1-चुनावी आंकड़े: मुख्यधारा की पार्टियों पर भारी AfD
जर्मन ब्रॉडकास्टर ARD के एग्जिट पोल और आधिकारिक अनुमानों के अनुसार:
-AfD का दबदबा: AfD को 43.8% से 44.5% वोट मिले हैं.
-CDU का प्रदर्शन: चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) की सेंटर-राइट पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) को मात्र 18.5% वोट मिले. AfD को मिले वोट CDU के प्रदर्शन से दोगुने से भी अधिक हैं.
-सीटों का गणित: शानदार प्रदर्शन के बावजूद AfD ने राज्य संसद की 83 सीटों में से 39 सीटें जीती हैं. हालांकि, वह पूर्ण बहुमत (42 सीटें) के जादुई आंकड़े से महज 3 सीटें दूर रह गई.

AfD के मुख्य उम्मीदवार उलरिच सिगमंड और सह-नेता ऐलिस वेडेल ने इन नतीजों को “ऐतिहासिक जनादेश” करार दिया है. सिगमंड के अनुसार, उनकी पार्टी ने राज्य में इतिहास रचा है और वे अन्य दलों से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन वे अपने राजनीतिक सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेंगे.
2-‘फायरवॉल’ नीति और सरकार बनाने का संकट
जीत के बावजूद AfD के लिए राज्य सरकार का गठन करना एक जटिल चुनौती बनी हुई है:
राजनीतिक फायरवॉल (Brandmauer): जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियां (CDU, SPD और ग्रीन्स) AfD के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन या सहयोग न करने की अपनी सख्त नीति पर कायम हैं.
घरेलू खुफिया एजेंसी का रुख: जर्मन घरेलू खुफिया एजेंसी ने AfD की क्षेत्रीय शाखा को आधिकारिक तौर पर “दक्षिणपंथी चरमपंथी” की श्रेणी में रखा है, जिसके चलते पारंपरिक दल इसे अछूत मान रहे हैं.
अल्पसंख्यक सरकार का विकल्प: मुख्यधारा के दल मिलकर किसी तरह एक जटिल अल्पसंख्यक व्यवस्था या वैकल्पिक गठजोड़ के जरिए AfD को सत्ता से दूर रखने की रणनीति बना रहे हैं. हालांकि, AfD के पास मौजूद विशाल जनसमर्थन के चलते ऐसी व्यवस्था चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.
3-जर्मनी के इस राजनीतिक बदलाव के 4 मुख्य सबक
81 साल बाद राजनीतिक वर्जनाओं का टूटना
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जर्मनी में कट्टर दक्षिणपंथी विचारधारा को मुख्यधारा से दूर रखने का एक अघोषित सामाजिक और राजनीतिक नियम था. एक अति-दक्षिणपंथी माने जाने वाले दल का 44% वोट शेयर हासिल करना यह दर्शाता है कि जर्मनी का राजनीतिक मिजाज अब पूरी तरह बदल चुका है.
नीतियों का दक्षिणपंथीकरण और ‘रीमाइग्रेशन’ की मांग
औपचारिक रूप से सरकार न बना पाने की स्थिति में भी AfD की इस बढ़त ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दों को बदल दिया है. अब प्रवासियों के खिलाफ सख्त नीतियां, बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों की वापसी (“रीमाइग्रेशन”), ग्रीन एनर्जी प्राथमिकताओं पर सवाल और रूस (क्रेमलिन) समर्थक विदेश नीति जैसे विचार जर्मन बहस के केंद्र में आ गए हैं.
फायरवॉल नीति की विफलता
यह नतीजा साबित करता है कि पारंपरिक दलों द्वारा AfD को रोकने के लिए बनाई गई ‘फायरवॉल’ रणनीति (राजनीतिक बहिष्कार) मतदाताओं को प्रभावित करने में नाकाम रही है. मुख्यधारा की नीतियों से असंतोष जताने के लिए जनता बड़े पैमाने पर AfD का रुख कर रही है.
संघीय सरकार पर भारी राष्ट्रीय दबाव
सैक्सनी-एनहाल्ट का यह फैसला चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और बर्लिन के केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है. आगामी राष्ट्रीय (संघीय) चुनावों से ठीक पहले आया यह जनादेश दिखाता है कि पारंपरिक मध्यमार्गी दल (Centrist Parties) अपना आधार तेजी से खो रहे हैं.
अभी जर्मनी में किसकी सरकार
वर्तमान में जर्मनी में क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU/CSU) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (SPD) के गठबंधन की सरकार है. जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ हैं. फरवरी 2025 में हुए मध्यावधि चुनाव में फ्रेडरिक मर्ज़ के नेतृत्व वाले गठबंधन (CDU/CSU) ने जीत हासिल की थी, जिसके बाद मई 2025 में उन्होंने चांसलर के रूप में शपथ ली.
यूरोपीय राजनीति का मुख्यधारा से दक्षिणपंथ की ओर खिसकना
AfD की यह जीत सिर्फ जर्मनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे यूरोप में पारंपरिक मुख्यधारा की पार्टियों के प्रति जनता के घटते भरोसे और असंतोष का संकेत देती है. प्रवासियों पर कड़ा रुख, महंगाई, ऊर्जा संकट और आर्थिक तंगी को लेकर जनता में गहरा गुस्सा है. जर्मनी में हुआ यह राजनीतिक उलटफेर फ्रांस जैसे देशों के लिए एक बड़ा संकेत है, जहां मरीन ले पेन की पार्टी ‘नेशनल रैली’ (RN) 2027 के राष्ट्रपति चुनावों में मुख्य दावेदार के रूप में उभर रही है. यूरोप की दो मुख्य ताकतों (जर्मनी और फ्रांस) में दक्षिणपंथ का बढ़ना यूरोपीय संघ (EU) के रक्षा, आव्रजन और सुरक्षा प्राथमिकताओं को बदल सकता है.
AfD का रुख रूस-समर्थक
AfD का रुख रूस-समर्थक (Pro-Kremlin) माना जाता है. पार्टी यूक्रेन को सैन्य सहायता देने और रूस पर प्रतिबंध लगाने का विरोध करती है. यदि जर्मनी की नीतियां इस दिशा में झुकती हैं, तो यूक्रेन के लिए यूरोपीय समर्थन कमजोर पड़ सकता है और रूस के प्रति नीति में बड़ा नरमी का रुख आ सकता है.
अमेरिका के साथ संबंध और नई भू-राजनीति
AfD जैसी ‘राष्ट्रवादी और अमेरिका-प्रथम’ (America First) सोच वाली लहर का वैश्विक समर्थन मिल रहा है. डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद इस चुनाव नतीजे का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया. जर्मनी में AfD के उभार से अमेरिका-यूरोप (NATO) के पारंपरिक सुरक्षा संबंधों में भी बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है.

