उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर चुनावी मोड में नजर आने लगी है। यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। आने वाले चुनाव में जहां भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा मैनपुरी जिले की किशनी विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।


पहले जानते हैं किशनी विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला मैनपुरी है। मैनपुरी जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें- मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं। ‘सीट का समीकरण’ की आज की कड़ी में हम मैनपुरी जिले की किशनी विधानसभा सीट की बात करेंगे। मैनपुरी जिले की किशनी विधानसभा सीट पहली बार वर्ष 1961 के परिसीमन आदेश के बाद अस्तित्व में आई थी और यहां पहला विधानसभा चुनाव 1962 में हुआ था।
