केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जाति की राजनीति से ऊपर उठकर मतदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब तक लोग जाति, धर्म और भाषा से ऊपर नहीं उठेंगे, भारतीय लोकतंत्र में बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि वोट आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों के आधार पर होना चाहिए। गडकरी शनिवार को नागपुर में आईआईएम-नागपुर के ‘मीडिया कॉन्क्लेव 2026’ में बोल रहे थे।
गडकरी ने जाति की राजनीति का अपना कौन सा अनुभव बताया?
नितिन गडकरी ने अपने राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह एक राजनीतिक दल के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने अलग-अलग जातियों के लिए अलग सेल बनाए थे। बाद में उन्हें महसूस हुआ कि इससे समस्या हल होने के बजाय उनके लिए ही परेशानी खड़ी हो गई। उन्होंने कहा कि यह प्रयोग काम नहीं आया और पार्टी को वोट भी नहीं मिले।
उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से साफ कर दिया था कि जो लोग जाति की बात करेंगे, उन्हें वह महत्व नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। उनका एजेंडा ही आगे रहेगा और वह वही काम करेंगे, जो जरूरी है।
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क्या जाति पर सख्त रुख का चुनावी नतीजे पर असर पड़ा?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनके इस रुख का चुनावी नतीजे पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने चुनाव जीत लिया। उन्होंने कहा कि जनता को काम और सेवा चाहिए। लोगों को ऐसा नेता चाहिए, जो उनके कल्याण के लिए काम करे। उन्होंने कहा कि लोगों को जाति के बजाय काम और सेवा पर ध्यान देने वाला नेतृत्व चाहिए। जनता ऐसे नेता की जरूरत महसूस करती है, जो उसके कल्याण के लिए काम करे।

