तमिलनाडु में सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने शनिवार को पूर्व डीएमके मंत्री केएन नेहरू से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया। डीवीएसी ने बताया कि चेन्नई, कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, इरोड और तिरुप्पुर समेत तमिलनाडु में 30 ठिकानों पर तलाशी ली गई।
डीवीएसी की ओर से जारी बयान में कहा गया, “तलाशी के दौरान निविदाओं में की गई अनियमितताओं से संबंधित 241 आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए। मामले की जांच जारी है।” बयान के अनुसार, नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में विभिन्न निविदाओं में कथित अनियमितताओं के संबंध में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
पूर्व मंत्री समेत 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
शाम को पत्रकारों से बातचीत में नेहरू ने कहा कि डीवीएसी अधिकारियों को कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई के कार्यालय से एक सामान्य फाइल और व्यक्तिगत हिसाब-किताब से जुड़े एक कागज की प्रतियां ली गईं। पूर्व मंत्री ने कहा, “मैं और मेरी टीम ने सुबह आठ बजे से सात घंटे तक चली तलाशी के दौरान अधिकारियों को पूरा सहयोग दिया। यह तलाशी निविदाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर की गई।”
उन्होंने स्वीकार किया कि उनके और उनके भाई समेत 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। नेहरू ने एक सवाल के जवाब में दावा किया कि विधानसभा में सरकार से सवाल करने में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें डराने या दबाव में लाने के लिए छापेमारी “राजनीति से प्रेरित” थी।
अदालत में साबित करेंगे बेगुनाही : केएन नेहरू
उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और वह अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। नेहरू फिलहाल तिरुचिरापल्ली पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके के उपनेता हैं। वह मध्य तमिलनाडु के प्रमुख डीएमके नेताओं में शामिल हैं।
डीएमके के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीवीके के मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि नेहरू से जुड़े ठिकानों पर तलाशी साक्ष्यों और शिकायतों के आधार पर की गई सामान्य कानूनी प्रक्रिया है। उन्होंने मदुरै में पत्रकारों से कहा, “यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई नहीं है, जैसा कि आरोप लगाया गया है। किसी को भी सतर्कता विभाग के कामकाज में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।”
डीवीएसी ने कहां-कहां की छापेमारी?
डीवीएसी ने तिरुचिरापल्ली में भी तलाशी ली, जहां नेहरू का आवास है। उनके भाई से जुड़े ठिकानों और चेन्नई समेत कई अन्य स्थानों पर भी तलाशी की गई। नेहरू के बड़ी संख्या में समर्थक और पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी उनके आवास के बाहर जुटे। नेहरू कुछ देर के लिए बाहर आए और समर्थकों से पार्टी कार्यालय जाने की अपील की।
सूत्रों के अनुसार, डीवीएसी की कार्रवाई नेहरू के नगर प्रशासन और जल आपूर्ति मंत्री रहने के दौरान 2,538 लोगों की कथित भर्ती में हुई अनियमितताओं से जुड़ी थी। डीवीएसी की प्राथमिकी में डीएमके के प्रमुख सचिव नेहरू, उनके भाइयों और कई अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
स्टालिन ने विजय सरकार पर साधा निशाना
स्टालिन ने छापेमारी की कड़ी निंदा करते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय में चल रहे मामले और विधानसभा सत्र के बीच राज्य सरकार “पूरी तरह राजनीति से प्रेरित ध्यान भटकाने की रणनीति” अपना रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि छापेमारी विपक्ष को डराने की कोशिश है।
उन्होंने सत्ता हासिल करने के लिए सत्तारूढ़ व्यवस्था पर विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया। टीवीके सरकार पहले ही इस आरोप से इनकार कर चुकी है। स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि सरकार बनाने के लिए उन्होंने दूसरे दलों के विधायकों को इस्तीफा देने के लिए प्रेरित किया और विधानसभा परिसर में ही उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया।”
डीएमके प्रमुख ने लगाए क्या आरोप?
उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में दर्ज औपचारिक शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच तक दर्ज नहीं की। स्टालिन ने ऐसी कार्रवाइयों को “भारतीय लोकतंत्र का अंधकारमय पक्ष” बताते हुए सरकार के कदमों को राजनीतिक “तमाशा” करार दिया। उन्होंने कहा कि न तो नेहरू और न ही डीएमके इससे डरने वाले हैं। स्टालिन ने कहा, “हम कानून के अनुसार हर चीज का सामना करेंगे और उस पर विजय हासिल करेंगे।” उन्होंने कहा कि पार्टी प्रशासन की कार्रवाइयों को कानूनी तरीके से चुनौती देगी।

