लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

नेपाल त्रासदी:सड़े अंग, बिलखते परिजन और 5000 लोग लापता; अब डीएनए टेस्ट ही क्यों बना अपनों का आखिरी सहारा? – Nepal Flood Dna Testing Missing Persons Body Identification

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को अपनों से दूर कर दिया। अब शवों की पहचान बड़ी चुनौती बन गई है। बाढ़ के पानी में बहकर आए शव कई जगह क्षत-विक्षत, सड़ चुके या अधूरे मिले हैं। ऐसे में चेहरा, कपड़े या सामान देखकर पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय तक पानी, कीचड़ और मलबे में रहने से शवों की पहचान वाली विशेषताएं भी खत्म हो सकती हैं। इसी वजह से डीएनए टेस्ट पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जा रहा है।

डीएनए टेस्ट से कितने शवों की पहचान हो पाई है?

अधिकारियों के मुताबिक, डीएनए सैंपल लेने और पहचान की दूसरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1,030 शव दफनाए जा चुके हैं। इनमें 222 महिलाएं, 355 पुरुष और 453 ऐसे शव हैं, जिनका लिंग तय नहीं किया जा सका। हालांकि अब तक सिर्फ 96 शवों की पहचान के बाद उन्हें परिवारों को सौंपा गया है। बाकी शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। पुलिस के मुताबिक, डीएनए जांच में शव के नमूने की तुलना उसके करीबी खून के रिश्तेदारों के नमूने से की जाती है।


  • माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन के डीएनए सैंपल पहचान में ज्यादा उपयोगी माने जाते हैं।

  • उंगलियों के निशान और दांतों के रिकॉर्ड भी मदद कर सकते हैं, लेकिन यह शव की स्थिति और उपलब्ध रिकॉर्ड पर निर्भर करता है।


राज कुमार के परिवार को डीएनए टेस्ट से क्या उम्मीद?

रासुवा जिले के स्याफ्रुबेसी में रहने वाले 33 वर्षीय राज कुमार, उनकी 30 वर्षीय पत्नी शृति और चार साल के बेटे सिराज का बाढ़ के बाद से पता नहीं है। परिवार ने नदी के किनारे चितवन और नवलपुर तक उनकी तलाश की। जिंदा मिलने की उम्मीद खत्म होने के बाद परिवार शव खोजने लगा। बाढ़ के पांच दिन बाद राज कुमार के भतीजे अविनाश को नवलपुर में एक इंसानी हाथ मिला। फोटो देखकर परिवार को लगा कि वह राज कुमार के हाथ जैसा है। मंगलवार को उस नमूने को काठमांडू की नेशनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया। यह सैंपल जांच की कतार में 182वें नंबर पर है। दियाली ने कहा, ‘हमने अब किसी और चीज की उम्मीद करना बंद कर दिया है। अगर वह हाथ मेरे भाई का भी निकला, तो कम से कम हमें पक्का पता चल जाएगा।’

यह भी पढ़ें: पीएम मोदी ने दिल्ली मेट्रो में किया सफर: बच्चों से की बातचीत, एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में हुए शामिल

नेपाल में परिवारों के लिए डीएनए सैंपल देना आसान कैसे किया गया?

नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिजनों की परेशानी कम करने के लिए नुवाकोट के बिदुर में डीएनए सैंपल कलेक्शन सेंटर खोला है। इससे परिवारों को सैंपल देने के लिए काठमांडू तक जाने की जरूरत नहीं होगी। पुलिस अस्पताल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल दामोदर पौडेल के मुताबिक, करीबी खून के रिश्तेदारों के नमूने शव से मिले डीएनए की तुलना में खास तौर पर उपयोगी हैं। अधिकारियों का कहना है कि शवों की पहचान में आ रही दिक्कतों के बीच डीएनए टेस्ट अहम भूमिका निभाएगा।


  • बाढ़ के बाद मिले शवों में कई गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हैं। इसलिए सामान्य पहचान के तरीके हर मामले में काम नहीं कर रहे।

  • डीएनए जांच में समय लगता है। शव और उसके रिश्तेदार, दोनों के जैविक नमूनों की तुलना करनी पड़ती है।

परिवार लापता लोगों की जानकारी कहां देख सकते हैं?

नेपाल पुलिस ने 1,270 अज्ञात शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है। परिवार इन विवरणों को देखकर पता कर सकते हैं कि उनके लापता रिश्तेदारों में से कोई बरामद हुआ है या नहीं। अधिकारियों के लिए शवों की पहचान जरूरी है, लेकिन परिवारों के लिए इसका मतलब इससे कहीं बड़ा है। पहचान होने पर उन्हें अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने का मौका मिलेगा। राज कुमार के परिवार की तरह कई परिवार अब डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उनके लिए यह जांच अपनों के बारे में सच जानने की आखिरी उम्मीद बन गई है।

कैसे मसीहा बने नेपाल बाढ़ के पीड़ित, दर्द भूल राहत कार्य में जुटे?

दूसरी ओर, इस भीषण त्रासदी के बीच, कई ऐसे पीड़ित सामने आए हैं जो अपने खुद के परिजनों को खोने या उनके लापता होने के बावजूद दूसरों की जान बचाने और मदद करने में दिन-रात जुटे हुए हैं। रसुवा के 31 वर्षीय सुदीप कुमार न्यौपाने ने इस आपदा में अपने छोटे भाई और दोस्त को खो दिया, लेकिन दो दिन के शोक के बाद वे बेघर हुए लोगों को खाना और राहत सामग्री बांटने के काम में लग गए। वहीं नुवाकोट के सुचित जोशी की पत्नी, सात साल की बेटी, भाभी और भतीजा अभी भी लापता हैं। इसके बावजूद सुचित अपनी टीम बनाकर बाढ़ में फंसे बुजुर्गों और अन्य लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल और राहत शिविरों तक पहुंचा रहे हैं। अपनों को ढूंढने की तड़प के बीच पीड़ितों की यह निस्वार्थ सेवा हर किसी की आंखें नम कर रही है।

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

बिग बाॅस 20:आम्रपाली दुबे से लेकर मैरी कॉम तक, सलमान के शो में शामिल हो सकते हैं ये सेलेब्स; देखें पूरी लिस्ट – From Amrapali Dubey To Mc Mary Kom Here Are Salman Khan Hosted Bigg Boss 20 Contestants Final List

भारत की मुहिम को मिली वैश्विक पहचान:27 नवंबर को बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित, यूएन का फैसला – Un-declares-november-27-international-day-to-end-child-marriage

Khabaron Ke Khiladi:कैसे साधे जा रहे यूपी में चुनावी समीकरण, महिलाओं के बाद युवा वोटरों पर कैसे सबकी निगाह? – Khabaron Ke Khiladi Up Elections Equation After Women Votes Now Youth Voters On Target Of Political Parties An

बकरी का मांस खाकर बीमार हुए गांव वाले:बड़ी संख्या में महिलाएं-बच्चे अस्पताल में भर्ती, सभी को एक ही परेशानी – Villagers Fall Ill After Eating Goat Meat Women And Children Hospitalized

हरमनप्रीत की ऐतिहासिक उपलब्धि:कप्तान के तौर पर 150 टी20 खेलने वाली पहली क्रिकेटर, पुरुष खिलाड़ी भी रह गए पीछे – Harmanpreet Kaur 150th T20i As Captain First Player To Reach Landmark Most Matches As Captain In Women’s T20is

मिस वर्ल्ड 2026:प्रतियोगिता में टूटी भारत की उम्मीदें, टॉप 40 से बाहर हुईं निकिता पोरवाल; यूजर्स हुए निराश – Miss World 2026 Nikita Porwal Live Updates Lost In Top 5 Of Asia And Oceania Continental Group

Leave a Comment