भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, जिसका उद्देश्य दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाना है। 193 सदस्यीय महासभा ने शुक्रवार को ‘करैक्ट द मैप’ प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दी। प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया, जबकि छह देशों ने मतदान से दूरी बनाई। टोगो की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन मतदान से अलग रहे, जबकि अमेरिका ने अकेले इसके खिलाफ मतदान किया।

भारतीय राजनयिक रघु पुरी बोले- मानचित्र के लिए तकनीकी आजादी जरूरी
भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने कहा कि भारत इस प्रस्ताव को समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रोजेक्शन के व्यापक इस्तेमाल और विचार को बढ़ावा देने के रूप में देखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का समर्थन किसी एक विशेष प्रोजेक्शन, जिसमें ‘इक्वल अर्थ’ भी शामिल है, को आधिकारिक तौर पर अपनाने का समर्थन नहीं है। पुरी ने कहा कि अलग-अलग मानचित्र प्रोजेक्शन में किसी क्षेत्र के आकार को लेकर धारणा में अंतर पैदा हो सकता है। खासतौर पर ऐसे प्रोजेक्शन में, जिनका उद्देश्य आकार के बजाय भूगोल की दूसरी विशेषताओं जैसे आकृति, दिशा या दूरी को बनाए रखना होता है। समान-क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन महाद्वीपों और भू-भागों के वास्तविक सापेक्ष आकार को अधिक बेहतर तरीके से दिखाने में मदद कर सकते हैं।
#WATCH | New York, US: The United Nations General Assembly officially adopted the ‘Correct the Map’ resolution by a vote of 164 to 1, marking a historic shift away from the traditional Mercator projection in favor of more accurate, equal-area representations like the Equal Earth… pic.twitter.com/DaN6MlULGK
— ANI (@ANI) September 5, 2026
उन्होंने कहा कि भारत प्रस्ताव में ऐसी भाषा के पक्ष में है, जो सटीक मानचित्रण को प्रोत्साहित करे, लेकिन किसी एक तकनीक या मानचित्र प्रणाली को अनिवार्य न बनाए। देशों, संस्थानों और मानचित्र विशेषज्ञों को अपनी जरूरत के अनुसार उपयुक्त प्रोजेक्शन चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। भारतीय राजनयिक के मुताबिक, भारत की स्थिति केवल इस सिद्धांत तक सीमित है कि जहां उद्देश्य महाद्वीपीय भू-भाग के सापेक्ष आकार को बनाए रखना हो, वहां समान-क्षेत्रफल वाले तरीकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे प्रस्ताव का उद्देश्य पूरा होगा और किसी एक विशेष कार्टोग्राफिक पद्धति को प्राथमिकता देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसी आधार पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘करैक्ट द मैप’ प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
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क्या मौजूदा विश्व मानचित्र में महाद्वीपों का आकार सही नहीं दिखता?
प्रस्ताव में कहा गया कि 16वीं सदी में समुद्री यात्राओं के लिए तैयार किया गया मर्केटर प्रोजेक्शन आज भी स्कूलों, मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधिकारिक सामग्री में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसमें भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्रों के आकार में काफी अंतर दिखाई देता है।
अफ्रीका और दक्षिण एशिया को लेकर क्या चिंता जताई गई?
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में कहा गया कि इस तरह का नक्शा अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के वास्तविक आकार को छोटा दिखाने में योगदान देता है। इससे दुनिया को देखने का एक असंतुलित नजरिया भी बन सकता है। प्रस्ताव का उद्देश्य मानचित्रों में दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों का ज्यादा संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।

