वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती साबित करते हुए देश के आम नागरिकों के हितों की रक्षा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिकागो में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने वैश्विक घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने के साथ-साथ अपनी घरेलू आवश्यकताओं को केंद्र में रखा। इसी का परिणाम है कि दुनिया भर के संकटों के बावजूद भारतीय किसान, घरेलू परिवार और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित रहे हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि जहां कई देशों के आर्थिक अनुमान लड़खड़ा गए, वहीं भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण माहौल में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखा।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कैसे सुरक्षित रही भारतीय अर्थव्यवस्था?
वित्त मंत्री के अनुसार, भारत की सफलता का आधार वैश्विक बदलावों को लगातार ट्रैक करने के साथ-साथ घरेलू जरूरतों को समझना रहा है। इसी नीतिगत सूझबूझ ने देश को बड़े आर्थिक झटकों से बचाए रखा है।
जीडीपी ग्रोथ को लेकर वित्त मंत्री ने क्या दावा किया?
निर्मला सीतारमण बताया कि भारत ने कोविड-19 महामारी के बाद से लगातार सात प्रतिशत से अधिक की जीडीपी ग्रोथ बनाए रखी है, और इस वर्ष भी विकास दर इसी दायरे में रहेगी। यह ग्रोथ कोविड-19, रूस-यूक्रेन युद्ध, टैरिफ अनिश्चितताओं और ईरान-अमेरिका संघर्ष जैसी गंभीर वैश्विक चुनौतियों के बावजूद हासिल की गई है।
राजकोषीय घाटे और कर्ज को लेकर क्या है सरकार का रोडमैप?
राजकोषीय अनुशासन पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक सरकारी उधारी को जीडीपी के 50 प्रतिशत के स्तर पर लाना है। कई विकसित देशों का कर्ज इस समय उनकी जीडीपी के 200 प्रतिशत से अधिक है, जबकि भारत ने अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा किया है। वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को सीमित करने का अंतिम लक्ष्य (लास्ट माइल) हासिल कर लिया गया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में राजकोषीय अनुशासन के रिकॉर्ड को श्रेय दिया।


