केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं. सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है. अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने 3.61, 3.833 और 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है. हालांकि, अभी इनमें से कोई भी आंकड़ा सरकार या 8वें वेतन आयोग की ओर से अंतिम रूप से तय नहीं किया गया है.
फिटमेंट फैक्टर के आधार पर मौजूदा बेसिक पे को नए वेतन ढांचे में बदलाव किया जाता है. ऐसे में फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, मौजूदा बेसिक पे से बनने वाली नई बेसिक सैलरी भी उतनी ही ज्यादा होगी.
अभी कितनी है बेसिक सैलरी?
7वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक पे 18000 रुपये प्रति माह तय की गई थी. 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक पे 7,000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये हुई थी. अब 8वें वेतन आयोग में कर्मचारी संगठन इससे काफी ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं.
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फिटमेंट फैक्टर 3.61 हुआ तो कितनी होगी सैलरी?
सर्वे ऑफ इंडिया के मंत्रिस्तरीय कर्मचारी संघ ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. अगर न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये पर 3.61 का फिटमेंट फैक्टर लगाया जाता है, तो इस हिसाब से Level-1 कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक पे करीब 64,980 रुपये, यानी लगभग 65000 रुपये हो सकती है.

3.833 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी होगी बेसिक सैलरी?
राष्ट्रीय परिषद – संयुक्त परामर्श तंत्र, स्टाफ पक्ष और भारत पेंशनर्स समाज ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. 18,000 रुपये की मौजूदा बेसिक सैलरी पर इसका हिसाब लगाया जाए तो नई बेसिक पे करीब 69,000 रुपये हो सकती है. इस प्रस्ताव के लागू होने पर मौजूदा 18,000 रुपये की बेसिक पे के मुकाबले करीब 50,994 रुपये की बढ़ोतरी होगी.
4.00 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी होगी बेसिक सैलरी?
सबसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ की ओर से की गई है. संगठन ने 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है. अगर 18,000 रुपये की मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे पर 4 का हिसाब लगाया जाए तो लेवल-1 कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक पे 72,000 रुपये हो सकती है.
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3.61 और 4.00 में कितना अंतर?
अगर 3.61 और 4.00 फिटमेंट फैक्टर की तुलना करें तो न्यूनतम बेसिक पे में बड़ा अंतर दिखाई देता है. 3.61 और 4.00 के प्रस्ताव के बीच 7,020 रुपये प्रति माह का अंतर है.
क्या 72 हजार रुपये होगी पूरी सैलरी?
यहां एक बात समझना जरूरी है. 64,980 रुपये, 69,000 रुपये और 72,000 रुपये पूरी सैलरी नहीं, बल्कि प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक पे हैं. कर्मचारी की वास्तविक इन-हैंड सैलरी में बेसिक पे के अलावा डीए, एचआरए, टीए और दूसरे भत्ते शामिल हो सकते हैं. 8वें वेतन आयोग के अंतिम वेतन ढांचे और भत्तों पर फैसला होने के बाद ही ये पता चलेगा कि कर्मचारियों की वास्तविक कुल सैलरी और इन-हैंड पे कितनी बढ़ेगी.
पेंशनर्स को भी होगा फायदा?
फिटमेंट फैक्टर का असर केवल मौजूदा कर्मचारियों की बेसिक पे तक सीमित नहीं है. बेसिक पे से जुड़े पेंशन और दूसरे रिटायरमेंट बेनिफिट पर भी इसका असर पड़ सकता है. हालांकि, पेंशन में बढ़ोतरी कितनी होगी, ये भी 8वें वेतन आयोग और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी.

