भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पुर्तगाल के विदेश मंत्री पाउलो रंजेल के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। बातचीत का मुख्य विषय पश्चिम एशिया में जारी अस्थिर स्थिति और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करना था। विदेश मंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने पुर्तगाल के विदेश मंत्री पाउलो रंजेल अच्छी बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर अपने विचार साझा किए। इसी कड़ी में विदेश मंत्री जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।
बैठक में भारत-रूस के व्यापक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। इस दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाओं पर विचार साझा किए। इस मामले में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नई दिल्ली में हुई भारत-रूस विदेशी कार्यालय की परामर्श बैठक में दोनों पक्षों ने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए।
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अब समझिए क्यों जरूरी है ये कूटनीतिक प्रयास?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि इस समय यह कूटनीतिक प्रयास इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मार्च की शुरुआत से होर्मुज की संकीर्ण जलसंधि में जहाजों की आवाजाही अचानक बंद हो गई है, जिससे भारत के पारंपरिक ऊर्जा मार्ग प्रभावित हुए हैं। इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से तेल आयात इस महीने काफी घट गया है।
हालांकि बढ़ते संघर्ष को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीद पर लगी पाबंदियों को हटा दिया है, जिससे भारत-रूस व्यापारिक रिश्ते में बदलाव आया है। इसके पहले अमेरिका ने इस पर 25% शुल्क लगाया था, जो कुल मिलाकर 50% तक पहुंच गया था, लेकिन फरवरी में व्यापार समझौते के ढांचे के बाद यह हटा लिया गया।
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भारत-रूस का व्यापार संबंध
गौरतलब भारत और रूस ने इस दौरान गैर-शुल्क बाधाओं और नियामक अड़चनों को हटाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर वार्षिक व्यापार लक्ष्य हासिल करने पर भी जोर दिया। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की तारीफ की और कहा कि मॉस्को इस साल प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक दौरे के लिए तैयार है।

