उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। देश की राजनीति का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बिजनौर जिले की बिजनौर (Bijnor) विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं बिजनौर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित बिजनौर जिला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाता है। जिले में कुल आठ विधानसभा सीटें हैं- नजीबाबाद, नगीना, बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर। शुरुआती विधानसभा चुनावों से ही इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा। 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में बिजनौर सीट से कांग्रेस की चंद्रावती विजयी हुई थीं। 1957 में भी कांग्रेस के टिकट पर चंद्रावती ने ही यहां दोबारा जीत दर्ज की।
2022 विधानसभा चुनाव के नतीजे कैसे रहे?
2022 के विधानसभा चुनाव में बिजनौर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में भाजपा की सुचि चौधरी ने राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के नीरज चौधरी को हराया था। इस चुनाव में भाजपा की सुचि चौधरी को 97,165 वोट मिले थे, जबकि आरएलडी के नीरज चौधरी को 95,720 वोट मिले। जीत का अंतर मात्र 1,445 वोट का रहा। इससे पहले 2017 में भी भाजपा उम्मीदवार सुचि चौधरी ने इस सीट से बड़ी जीत हासिल की थी, तब उन्होंने सपा की रुचि वीरा को बड़े अंतर से हराया था।

