लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नजर आई महिला सैन्य अधिकारी की पहचान को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रम पैदा हुआ। कुछ पोस्ट में कैप्टन सोनिया सिंह चौहान का नाम सामने आया, जबकि रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी में कैप्टन रितिका खरेता को ध्वजारोहण में सहायता करने वाली अधिकारी बताया गया था। रितिका जनवरी 2025 में गणतंत्र दिवस परेड में कोर ऑफ सिग्नल्स की 146 जवानों वाली टुकड़ी का नेतृत्व कर चुकी हैं और सेना में अपने नेतृत्व के लिए पहचान बना चुकी हैं।
नाम को लेकर क्यों पैदा हुआ भ्रम?
सोशल मीडिया पर अधिकारी की पहचान को लेकर कई तरह की पोस्ट वायरल हुईं। कुछ जगहों पर कैप्टन सोनिया सिंह चौहान का नाम बताया गया, वहीं बाद में कैप्टन रितिका खरेता को प्रधानमंत्री के साथ ध्वजारोहण में सहायता करने वाली अधिकारी बताया गया। इसी वजह से सोशल मीडिया पर दोनों नामों को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि अधिकारी की गलत पहचान को लेकर रिपोर्ट सामने आने के बाद रक्षा मंत्रालय की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई। इन पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ध्वजारोहण में सहायता करने वाली अधिकारी कैप्टन रितिका खरेता थीं। यह भी दावा किया गया कि शुरुआत में कैप्टन सोनिया सिंह चौहान को यह जिम्मेदारी दी जानी थी, लेकिन अंतिम समय में ड्यूटी में बदलाव कर दिया गया। ऐसे में नाम को लेकर पैदा हुआ भ्रम इस अंतिम समय के बदलाव से भी जुड़ा बताया गया।
आधिकारिक जानकारी में रितिका खरेता का नाम
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में पहले ही स्पष्ट किया गया था कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सहायता करने की जिम्मेदारी कैप्टन रितिका खरेता की होगी। सरकारी प्रेस रिलीज में उनके नाम का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। ऐसे में आधिकारिक जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर चल रही पहचान संबंधी उलझन काफी हद तक साफ हो जाती है।
कौन हैं कैप्टन रितिका खरेता?
कैप्टन रितिका खरेता भारतीय सेना की अधिकारी हैं। उन्होंने जनवरी 2025 में आयोजित 76वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा था। कर्तव्य पथ पर उन्होंने कोर ऑफ सिग्नल्स की 146 पुरुष जवानों वाली मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व किया था। इस टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली वह अकेली महिला कमांडर थीं। उनके नेतृत्व में जवानों की सधी हुई चाल, अनुशासन और उनका आत्मविश्वास परेड के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। सेना की तकनीकी और संचार क्षमताओं से जुड़ी कोर ऑफ सिग्नल्स में उनकी भूमिका ने उन्हें महिला सैन्य अधिकारियों के बीच अलग पहचान दिलाई।
दिल्ली में हुई पढ़ाई, परिवार से मिला सेना का जुड़ाव
रितिका खरेता दिल्ली की रहने वाली हैं। उन्होंने पुष्प विहार स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई की और 2016 बैच की छात्रा रहीं। उनके पिता दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं, जबकि उनकी मां शिक्षिका हैं। रितिका अपने परिवार से सेना में अधिकारी बनने वाली पहली सदस्य हैं। हालांकि, सैन्य सेवा से उनके परिवार का रिश्ता पुराना है। उनके परदादा भी सेना में रह चुके हैं और उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।
12 अधिकारियों में चयन के बाद संभाली कमान
गणतंत्र दिवस परेड में कोर ऑफ सिग्नल्स की मार्चिंग टुकड़ी की कमान सौंपे जाने से पहले रितिका का चयन जबलपुर स्थित सिग्नल ट्रेनिंग सेंटर में 12 अधिकारियों के बीच हुई चयन प्रक्रिया के बाद किया गया था। चयन के बाद उन्होंने कर्तव्य पथ पर 146 जवानों वाली टुकड़ी का नेतृत्व किया। संचार और तकनीकी विशेषज्ञता के लिए जानी जाने वाली कोर ऑफ सिग्नल्स की इस जिम्मेदारी ने सेना में उनके नेतृत्व कौशल को राष्ट्रीय मंच पर सामने रखा।
महत्वपूर्ण ड्यूटी में रिजर्व अधिकारी क्यों रखा जाता है?
राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण समारोहों में किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक या रिजर्व अधिकारी की व्यवस्था रखना सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा हो सकता है। यदि मुख्य अधिकारी अंतिम समय में किसी कारण से ड्यूटी नहीं कर पाते हैं, तो वैकल्पिक अधिकारी जिम्मेदारी संभाल सकता है और कार्यक्रम बिना किसी बाधा के जारी रहता है। इसलिए किसी अधिकारी का अंतिम समय में बदला जाना अपने आप में असामान्य घटना नहीं माना जाता। इसी व्यवस्था को सोशल मीडिया पर सामने आए नामों के अंतर की एक संभावित वजह बताया गया है।
पहले भी महिला अधिकारियों ने संभाली है यह जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री के साथ स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ध्वजारोहण की प्रक्रिया में महिला सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी नई बात नहीं है। अलग-अलग वर्षों में महिला अधिकारियों को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है।
2020: द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना की मेजर श्वेता पांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तिरंगा फहराने में सहायता की थी।
2021: लेफ्टिनेंट कमांडर पी. प्रियंवदा साहू ने ध्वजारोहण के दौरान प्रधानमंत्री की सहायता की थी।
2023: मेजर निकिता नायर और मेजर जैस्मीन कौर ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराने की प्रक्रिया में प्रधानमंत्री का साथ दिया था।
2025: भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ऑफिसर राशिका शर्मा ने लाल किले की प्राचीर पर यह जिम्मेदारी निभाई थी।
2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के साथ ध्वजारोहण प्रक्रिया में कैप्टन रितिका खरेता की भूमिका रही।

