जिले के सिरोंज बस स्टैंड पर गुरुवार को दर्जनों स्कूली छात्राओं ने बस किराए में अचानक हुई बढ़ोतरी के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्राओं ने नारेबाजी करते हुए किराया कम करने की मांग की। करीब आधे घंटे तक चले शांतिपूर्ण प्रदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों से पढ़ने आने वाली छात्राओं ने कहा कि बढ़े हुए किराए के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने बताया कि पहले गांव से सिरोंज आने-जाने का बस किराया 10 से 15 रुपये था, लेकिन अब इसमें बढ़ोतरी कर दी गई है। रोजाना स्कूल आने-जाने वाली छात्राओं पर इसका सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
एक छात्रा ने कहा कि उनके माता-पिता खेती और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में प्रतिदिन 10 से 20 रुपये अतिरिक्त किराया देना उनके लिए आसान नहीं है। यदि किराया कम नहीं किया गया तो कई छात्राओं को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। एक अन्य छात्रा ने कहा, “हम पढ़ने आते हैं, कमाने नहीं। किराया कम किया जाए, वरना कई छात्राओं की शिक्षा बीच में ही रुक जाएगी। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही एसडीएम ओम नारायण बड़कुल बस स्टैंड पहुंचे। उन्होंने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की सराहना की।
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एसडीएम क्या बोले?
एसडीएम ने आश्वासन दिया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए बस किराया निर्धारण और परिवहन विभाग की गाइडलाइन की समीक्षा कराई जाएगी तथा जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक कारणों से किसी भी छात्रा की पढ़ाई बाधित नहीं होने दी जाएगी।
छात्राओं ने सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि विधायक इस मुद्दे को शासन स्तर पर उठाकर बस किराया पहले की दरों पर बहाल कराने की पहल करें। मांग पत्र में छात्राओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए सस्ता और सुरक्षित परिवहन जरूरी है। किराया बढ़ने से स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या बढ़ सकती है।
स्थानीय शिक्षकों का भी कहना है कि बस किराया सीधे विद्यार्थियों की स्कूल उपस्थिति से जुड़ा है। सिरोंज और आसपास के कई गांवों से छात्राएं बस से ही स्कूल आती हैं। किराया बढ़ने से परिवारों पर हर महीने लगभग 300 से 400 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, जो गरीब परिवारों के लिए बड़ी समस्या है। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं हुई। हाथों में तख्तियां लेकर खड़ी छात्राओं ने एक ही मांग दोहराई “शिक्षा को महंगा मत करो।”


