मुख्य आरोपी कौन था?
चार्जशीट में डॉ. उमर उन नबी को मुख्य आरोपी बताया गया था। वह धमाके में इस्तेमाल कार में मौजूद था और विस्फोट में उसकी मौत हो गई थी। एनआईए ने डीएनए जांच के जरिए उसकी पहचान की। एजेंसी के मुताबिक, वह फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन का पूर्व सहायक प्रोफेसर था। उसकी मौत के कारण उसके खिलाफ आरोपों को समाप्त करने का प्रस्ताव चार्जशीट में रखा गया था।
इस मामले में कितने आरोपी हैं?
14 मई 2026 को दाखिल पहली चार्जशीट में 10 आरोपियों को नामजद किया गया था। इनमें डॉ. उमर उन नबी के अलावा आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, शोएब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल थे।
एनआईए के मुताबिक, जांच जम्मू-कश्मीर के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर तक फैली थी। चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री शामिल की गई थी। उस समय तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था।
मामले की जांच चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी जारी रही। 27 जून 2026 को एनआईए ने तीन और आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की। इनमें जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट और मुजफ्फर अहमद उर्फ फराज उर्फ जफर शामिल थे। इसके बाद इस मामले में चार्जशीट किए गए आरोपियों की संख्या 13 हो गई।
एनआईए को जांच में और क्या मिला?
एनआईए के मुताबिक, आरोपियों ने प्रतिबंधित हथियार हासिल किए थे। जांच में एके-47, क्रिंकोव राइफल और देशी पिस्तौल जैसे हथियारों की अवैध खरीद का भी उल्लेख किया गया। एजेंसी के मुताबिक, नेटवर्क के सदस्यों ने रॉकेट और ड्रोन से लगाए जाने वाले विस्फोटक उपकरणों पर प्रयोग किए। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि इनका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर और भारत के दूसरे हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की योजना में किया जाना था।


