चीन अमेरिका से इस मामले में आगे निकल सकता है. मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने चेतावनी जारी की है. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में अमेरिका के चीन से पिछड़ने का खतरा बताया है. उन्होंने कहा है कि चीन को एनर्जी और डेटा सेंटर बनाने की क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है. जकरबर्ग ने एक नोट में कहा है कि जो देश एडवांस्ड एआई के डेवलपमेंट में आगे रहेंगे. वह जियोपॉलिटिकल पावर में बैलेंस भूमिका निभाएंगे.
जकरबर्ग ने कहा, ‘जो देश एडवांस्ड एआई के डेवलपमेंट और इस्तेमाल में आगे रहेंगे, वो एक नए जियोपॉलिटिकल पावर बैलेंस में योगदान देंगे. यह भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों, समृद्धि और सुरक्षा की स्थिति को तय करेगा.’
इस मामले में हम पीछे हैं: जकरबर्ग
जकरबर्ग ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया है कि भले ही सिलिकॉन डिजाइन में अमेरिका और उसके देशों को बढ़त हासिल हो, लेकिन एनर्जी क्षमता और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की रफ्तार में वह पीछे है. जकरबर्ग ने कहा, ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में अमेरिका और उसके सहयोगियों को सिलिकॉन डिजाइनम में बढ़त तो हासिल है, लेकिन हम कितनी तेजी से एनर्जी क्षमता और फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर बना सकते हैं. इस मामले में हम पीछे हैं. चीन जैसे देश हर दूसरे हफ्ते में 1GW से ज्यादा न्यूक्लियर क्षमता शुरू कर रहे हैं. इसलिए कॉम्पिटिशन में बने रहने के लिए हमें एनर्जी और डेटा सेंटर बनाने की स्पीड को बढ़ाना होगा.’
AI इतिहास की सबसे ज्यादा कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्री है: जकरबर्ग
इसके अलावा एआई लीडरशिप पर बात करते हुए जकरबर्ग ने कहा, ‘सबसे एडवांस्ड मॉडल और प्रोडक्ट बनाने के लिए हमें समझना होगा, कि AI शायद इतिहास की सबसे ज्यादा कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्री है. इनोवेशन की तेजी से नकल की जाती है. कुछ ही महीनों में उन्हें अपना लिया जाता है. कोई भी पॉलिसी जो अमेरिकी मॉडल को रिलीज को धीमा करती है, भले ही एक महीने के लिए, अमेरिकी लीडरशिप के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है. विदेश मॉडल को आगे निकलने का मौका दे सकती है. जब नई क्षमताएं सामने आती हैं, तो यह जरूरी है कि अमेरिकी सरकार के पास अहम सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए एडवांस्ड जानकारी और संसाधन हों. शायद एडवांस्ड सिस्टम का इस्तेमाल करने में कुछ समय के लिए बढ़त भी मिले.’
इसके अलावा उन्होंने कहा, ‘जैसे जैसे इंटेलिजेंस आम होती जाएगी, सबसे जरूरी सवाल यह होगा कि हम इसे किस दिशा में ले जाते हैं. कुछ लोगों का तर्क है कि सुपरइंटेलिजेंस या इसे कंट्रोल करने वाले कुछ एक्सपर्ट्स को ही यह तय करना चाहिए कि इंसानियत के लिए क्या बेहतर है. हम इससे सहमत नहीं हैं. लोकतंत्र और अर्थशास्त्र के इतिहास से पता चलता है कि लोग बेहतर जिंदगी को कैसे परिभाषित करते हैं. इसका कोई एक सही जवाब नहीं है. इसलिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि लोग खुद तय करें, कि उनकी जिंदगी में क्या मायने रखता है.’

