कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किए जाने का खूब ढिंढोरा पीटा गया। जबकि धरातल पर एक बारिश भी यह एक्सप्रेसवे झेल नहीं पाया है। एक जगह पर कर्मचारी मरम्मत कर नहीं पाते हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क धंस जाती है।
कानपुर-लखनऊ के बीच नवनिर्मित 63 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड एक्सप्रेसवे (एनई-6) का 13 जुलाई को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकार्पण किया था। दावा किया गया था कि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया गया है।
इससे बिना रुके वाहन सवार सीधे लखनऊ से कानपुर के बीच कम समय में सफर कर सकेंगे। हालांकि यह दावा एक माह के अंदर ही टूट गया जब पहली ही बारिश में सड़क धंसना शुरू हुई। वर्तमान में हालत यह है कि एक जगह मरम्मत का काम पूरा हो नहीं पाता है कि दूसरी ओर सड़क धंस जाती है। इसके चलते पूरे एक्सप्रेसवे पर ही लगभग मरम्मत कार्य ही चल रहा है।