जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम। सैकड़ों छात्र सरकारी नौकरियों में घूसखोरी, संगठित गिरोह और भर्ती प्रक्रिया के विरोध में 11 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। रात के करीब दो बजे हैं। चारों तरफ अंधेरा, उमस और मच्छरों के बीच खुले आसमान के नीचे चादर बिछाकर छात्र सोने की कोशिश करते हैं। कुछ देर बाद ढोल और मांदर की आवाज गूंजने लगती है, झारखंड के पारंपरिक लोकगीत पूरे आंदोलन स्थल में ऊर्जा भर देते हैं। सुबह होते ही फिर वही गीत, वही नारे और न्याय की मांग। बारिश हो या तेज धूप, प्रदर्शनकारी अपनी जगह छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
प्रदर्शन की खास बात यह है कि आंदोलनकारियों ने अपनी आचार संहिता तैयार की है। नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर से अभद्र नारे लगे, सियासत से जुड़े लोग भी पहुंचे। जेन-जी ने जो भाषा इस्तेमाल की, उसकी सत्ता पक्ष ने जमकर आलोचना की। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने इंस्टग्राम पर इस बारे में वीडियो तक साझा किया। संभवत: यही वजह है कि रांची में आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि मंच पर कोई भी राजनीतिक दल या बाहरी नेता नहीं आएगा। किसी भी प्रकार का राजनीतिक, धार्मिक व जातिगत वक्तव्य नहीं दिया जाएगा।
आंदोलन के मुख्य उद्देश्य पर ही बात रखी जाएगी। लड़ाई व्यवस्था में सुधार की है, इसलिए किसी भी व्यक्ति पर मंच से आरोप नहीं लगाए जाएंगे और अपने वक्तव्य में अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इसका पोस्टर भी चस्पा किया गया है। अमर उजाला ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की, तो पता चला कि दूर-दराज के गांवों से भोजन और जरूरी सामान भेज रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में जुटे युवाओं के लिए वह पर्याप्त नहीं है। कई छात्र कई दिनों से बिस्कुट और नमकीन के सहारे आंदोलन चला रहे हैं।
तीन छात्र आमरण अनशन पर, एक की तबीयत बिगड़ी
धरने का भावुक पक्ष आमरण अनशन पर बैठे तीन छात्र हैं। इनमें तीन दिन से अन्न-जल त्यागकर बैठे देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों को उन्हें ड्रिप लगानी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने अनशन समाप्त करने से इन्कार कर दिया और न्याय न मिलने की सूरत में जान की परवाह न करने की बात कही। दूसरी ओर, एक अन्य छात्र ब्रह्मानंद तेज बारिश और खराब मौसम के बावजूद खुले आसमान के नीचे अनशन जारी रखे हुए हैं। इसके अलावा 5 अन्य छात्र भी धरनारत हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों की ये हैं प्रमुख मांगें
- जेपीएससी और जेएसएससी की सभी विवादित परीक्षाओं की सीबीआई और ईडी से जांच।
- जिन परीक्षाओं पर गंभीर आरोप हैं, उन्हें रद्द कर दोबारा कराया जाए।
- पेपर लीक और भर्ती भ्रष्टाचार में शामिल लोगों की संपत्ति जब्त हो।
- भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाई जाए।
- समयबद्ध भर्ती कैलेंडर लागू किया जाए।
- लंबित नियुक्तियां शीघ्र पूरी की जाएं।
- आयोगों की जवाबदेही तय की जाए।
- भर्ती घोटालों की निगरानी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में हो।

