Income Tax Notice: आज के समय में अधिकांश लोग UPI पेमेंट्स, नेट बैंकिंग और बाकी ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस के ऊपर पूरी तरह से निर्भर हैं. रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हर काम जैसे सब्जी खरीदना, दूध खरीदना या कोई बड़ी खरीदारी को लेकर भी डिजिटल पेमेंट्स का ही सहारा लिया जाता है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या हर डिजिटल ट्रांजैक्शन पर इनकम टैक्स विभाग की नजर रहती है? क्या ज्यादा ऑनलाइन लेनदेन करने पर टैक्स नोटिस आ सकता है? आइये बताते हैं.
क्या हर डिजिटल ट्रांजैक्शन पर रहती है नजर?
सबसे पहले आपको ये जान लेना जरूरी है कि इनकम टैक्स विभाग हर छोटे ट्रांजैक्शन को नहीं देखता. बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाएं स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (SFT) के जरिए सिर्फ बड़े लेनदेन की जानकारी सरकार को भेजती हैं.
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ये ट्रांजैक्शंस आते हैं इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अंतर्गत:
- सेविंग अकाउंट में एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये या उससे अधिक नकद जमा होने पर इसकी जानकारी टैक्स विभाग को दी जाती है.
- करंट अकाउंट में 50 लाख रुपये या उससे अधिक नकद जमा या निकासी की रिपोर्ट की जाती है.
- अगर कोई व्यक्ति क्रेडिट कार्ड का 1 लाख रुपये से ज्यादा बिल नकद में चुकाता है या 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा का भुगतान किसी भी माध्यम से करता है, तो इसकी जानकारी भी विभाग तक पहुंचती है.
- 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा की फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड या डिबेंचर में निवेश और 30 लाख रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी की खरीद या बिक्री भी रिपोर्ट की जाती है.
- एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये से ज्यादा विदेशी मुद्रा या फॉरेक्स कार्ड पर खर्च होने पर भी जानकारी टैक्स विभाग को भेजी जाती है.
नोटिस आने पर क्या होगा?
अगर आप किसी बड़ी रकम का सही स्रोत नहीं बता पाते, तो उसे अघोषित आय माना जा सकता है. ऐसे मामलों में अतिरिक्त टैक्स और जुर्माना देना पड़ सकता है. गंभीर मामलों में टैक्स और पेनाल्टी मिलाकर करीब 78 प्रतिशत तक का भुगतान करना पड़ सकता है. कुछ मामलों में विभाग पुराने टैक्स रिकॉर्ड भी दोबारा खोल सकता है.
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नोटिस से बचने का तरीका जानें
इनकम टैक्स विभाग के इस नोटिस से बचने का तरीका भी है, जिसके तहत व्यक्तिगत और बिजनेस लेनदेन के लिए अलग-अलग बैंक खाते रखें. फ्रीलांसर और छोटे कारोबारी अपनी आय का पूरा रिकॉर्ड रखें. किसी रिश्तेदार से बड़ी रकम या गिफ्ट मिलने पर उसके दस्तावेज संभालकर रखें. इसके अलावा ITR भरने से पहले AIS और Form 26AS जरूर चेक कर लें. अगर इनमें कोई गलत या अनजान ट्रांजैक्शन दिखे, तो इनकम टैक्स पोर्टल पर उपलब्ध फीडबैक विकल्प के जरिए इसकी जानकारी दें.
