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Supreme Court:पर्यावरण मंजूरी से जुड़े मामले में आज आएगा अहम फैसला, सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजरें – Supreme Court Updates Verdict On Retrospective Green Clearance For Projects Other Legal Case Hearing News

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सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरियों से संबंधित याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगा। ये याचिकाएं उन परियोजनाओं से जुड़ी हैं जिन्होंने हरित मानदंडों का उल्लंघन किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ 49 याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी। शीर्ष अदालत ने छह दिनों तक सुनवाई के बाद इस साल एक अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इस मामले में सरकार का पक्ष क्या है?

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने सरकार के कार्यालय ज्ञापन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी देता है, पर ‘एकमुश्त’ नियमितीकरण नहीं है। भाटी ने तर्क दिया कि सरकार पर्यावरण संबंधी न्यायशास्त्र को कमजोर करने की कोई सिफारिश नहीं करती है और कानून के दायरे का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नियामक व्यवस्थाओं के विकास को भी समझाया, बताया कि पहले जिन उद्योगों को मंजूरी नहीं चाहिए थी, उन्हें अब हरित कानूनों के दायरे में लाया गया है। भाटी ने कहा कि कानूनी रूप से संचालित होने वाली इकाइयों को पहले बंद करना होगा, फिर विशेषज्ञ मूल्यांकन से गुजरना होगा, भारी जुर्माना देना होगा और पिछले नुकसान के लिए उपचारात्मक योजना प्रस्तुत करनी होगी।

विरोध में क्या तर्क दिए गए?

वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और संजय पारिख सहित विभिन्न पक्षों के वकीलों ने पूर्वव्यापी मंजूरियों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों को मानदंडों का उल्लंघन करने की छूट नहीं दी जा सकती, वे जुर्माने का भुगतान करके बाद में अनुमति मिलने की उम्मीद नहीं कर सकते। वकील सृष्टि अग्निहोत्री ने इस विचार का विरोध किया, कहा कि परियोजनाओं को ‘प्राथमिक’ पर्यावरण मंजूरी देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है। उन्होंने तर्क दिया कि ‘प्रदूषणकर्ता भुगतान करे’ के सिद्धांत को ‘प्रदूषण करो और भुगतान करो’ तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। अग्निहोत्री ने पर्यावरण संरक्षण पर रियो घोषणा और अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का भी हवाला दिया।

मामले का पूरा घटनाक्रम क्या?

शीर्ष अदालत ने 16 मई, 2025 के अपने वनशक्ति फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की थी। 16 मई, 2025 को जस्टिस ए एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्वव्यापी मंजूरी देने से रोक दिया था। हालांकि, 18 नवंबर, 2025 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 के बहुमत से फैसला सुनाया। इस फैसले ने भारी जुर्माना लेकर पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी देने का मार्ग प्रशस्त किया, यह देखते हुए कि अन्यथा सार्वजनिक कोष से करीब 20,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं ध्वस्त हो जातीं। अदालत ने याचिकाओं पर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया था। पीठ ने यह भी कहा कि रियो घोषणा और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कानून राष्ट्र राज्यों की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, अमेरिका और चीन जैसे देश इन घोषणाओं के प्रति उदासीन हैं।

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