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शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों ने एक दूसरे को गले लगाकर इस पल का स्वागत किया। लेकिन, यह जश्न ज्यादा देर तक सिर्फ प्रदर्शनकारियों का नहीं रहा। शनिवार को कुछ ही समय में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जंतर मंतर पहुंचने लगे। देखते ही देखते प्रदर्शन का मंच राजनीतिक झंडों, नारों और नेताओं की मौजूदगी से भर गया। इसी के साथ जंतर मंतर पर प्रदर्शन की जीत का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई। आंदोलन की सफलता के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि आखिर इस जीत का असली श्रेय किसे मिलना चाहिए।

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जंतर मंतर पर जश्न मनाते प्रदर्शनकारी
– फोटो : जी पाल
राजनीतिक गतिविधियां तेज
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जब प्रदर्शन अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था, तब वह दिन रात सड़क पर डटे रहे। तेज धूप, बारिश और लंबा इंतजार झेलने के बाद जब सरकार ने फैसला लिया, तब कई राजनीतिक दल जश्न में शामिल होने पहुंच गए। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर फैलते ही जंतर मंतर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।

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जंतर मंतर पर जश्न मनाते प्रदर्शनकारी
– फोटो : जी पाल
आप, कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी पहुंची
आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, आजाद समाज पार्टी समेत कई दलों के नेता और समर्थक अपने अपने झंडों और बैनरों के साथ पहुंचे। मंच के आसपास अलग अलग दलों के नारे सुनाई देने लगे। कई नेताओं ने इसे जनता की जीत बताया और कहा कि सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। मीडिया कैमरों के सामने नेताओं की मौजूदगी बढ़ गई। कार्यकर्ता अपने दल के झंडे लेकर तस्वीरें और वीडियो बनाते दिखाई दिए। कुछ देर पहले तक जहां छात्र और युवा आंदोलन के नारे लगा रहे थे, वहां अब राजनीतिक नारों की गूंज सुनाई देने लगी।

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जंतर मंतर पर जश्न मनाते प्रदर्शनकारी
– फोटो : जी पाल
‘संघर्ष हमारा था, अब सब अपनी जीत बता रहे हैं’
राजनीतिक दलों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर कई प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी भी जताई। प्रदर्शनकारी रमन ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों ने की थी। कई सप्ताह तक हजारों लोग बिना किसी राजनीतिक झंडे के अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। उन्होंने कहा कि जब आंदोलन कठिन दौर में था, तब बहुत कम लोग साथ दिखाई दिए। लेकिन जैसे ही सफलता मिली, कई राजनीतिक दल खुद को इस आंदोलन का हिस्सा बताने लगे।

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जंतर मंतर पर जश्न मनाते प्रदर्शनकारी
– फोटो : जी पाल
धूप, बारिश और हर मुश्किल में आंदोलन जारी रखा
प्रदर्शनकारी मनोज ने बताया कि हमने धूप, बारिश और हर मुश्किल में आंदोलन जारी रखा। कई दिनों तक घर नहीं गए। अब जब जीत मिली है तो हर कोई इसे अपनी जीत बताने में लगा है। राजनीतिक दलों का समर्थन ठीक है, लेकिन पूरे आंदोलन का श्रेय लेने की कोशिश उचित नहीं है। उनके मुताबिक, आंदोलन को सफल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका उन छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों की रही, जिन्होंने लगातार धरना जारी रखा और सरकार पर दबाव बनाए रखा।


