दतिया विधानसभा उपचुनाव में रोज बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। लेकिन रविवार को प्रचार के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने चुनावी तल्खी के बीच सियासी शिष्टाचार की मिसाल पेश कर दी। मौका था कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की जनसभा का। इसी दौरान सभा के पास से गुजर रहे भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को पटवारी ने हाथ देकर रुकने का इशारा किया। और फिर जो हुआ उसने कार्यकर्ताओं से लेकर सोशल मीडिया तक सबका ध्यान खींच लिया।
जीतू पटवारी के इशारे पर आशुतोष तिवारी मंच के पास पहुंचे। पटवारी ने आगे बढ़कर उनसे हाथ मिलाया और गले लगाया। कुछ पल की इस मुलाकात में कोई तल्खी नहीं, कोई नारेबाजी नहीं, सिर्फ आपसी सम्मान दिखा। दोनों के बीच कुछ देर सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई। इसके बाद पटवारी ने मजाकिया अंदाज में आशुतोष को माइक थमा दिया। माहौल पहले से ही गर्म था, लेकिन अब उसमें हंसी के ठहाके भी जुड़ गए। माइक हाथ में आते ही आशुतोष तिवारी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चुनाव अलग बात है, लेकिन आपसी सम्मान बना रहना चाहिए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी अपने लिए समर्थन की अपील कर डाली।
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इस पर जीतू पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, आपको यहां कोई जानता नहीं है। पटवारी के इस तीर का आशुतोष ने तुरंत जवाब दिया, दतिया की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मेरा मकान है, मैं यहीं का हूं। बस फिर क्या था। पटवारी के तंज और आशुतोष के जवाब पर पूरा पंडाल तालियों और ठहाकों से गूंज उठा। चुनावी मंच पर दुश्मनी नहीं, बल्कि एक स्वस्थ संवाद देखने को मिला। इस पूरी मुलाकात का वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग इसे चुनावी नोकझोंक का सबसे सभ्य उदाहरण बता रहे हैं। राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि दतिया में भले ही कांटे की टक्कर हो, लेकिन दोनों दलों के बड़े चेहरे लोकतांत्रिक मर्यादा को आज भी जिंदा रखे हुए हैं। पिछले कुछ दिनों से दतिया में आरोपों का दौर तेज है। भाजपा विकास के मुद्दे पर वोट मांग रही है, तो कांग्रेस बदलाव की बात कर रही है। ऐसे में पटवारी और आशुतोष की यह मुलाकात कार्यकर्ताओं के लिए राहत लेकर आई। कार्यक्रम के बाद दोनों नेता अपने-अपने रास्ते निकल गए। पटवारी ने आगे की सभाओं को संबोधित किया, तो आशुतोष तिवारी डोर-टू-डोर प्रचार में जुट गए।
दतिया उपचुनाव अब अंतिम चरण में है। 30 तारीख को वोटिंग है और दोनों दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच रविवार को जो हुआ उसने साबित कर दिया कि चुनाव आते-जाते रहेंगे, रिश्ते और मर्यादा बनी रहनी चाहिए।
