कार्यभार संभालने के छह घंटे के भीतर दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर अनुराग कुमार ने जंतर-मंतर के लिए विशेष रणनीति तैयार की और बिना किसी टकराव के अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हटा दिया गया। ऑपरेशन इस कदर गोपनीय था कि मौके पर तैनात पुलिस कर्मियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। उन्हें सुरक्षा अभ्यास के नाम पर जंतर-मंतर बुलाया गया। सुबह वायरलेस पर दोबारा संदेश आते ही सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचा दिया गया।

नए कमिश्नर अनुराग कुमार ने पद संभालते ही शुक्रवार शाम को उन पुलिस अधिकारियों को बुलाया जो कभी जंतर-मंतर पर तैनात रहे या किसी बड़े प्रर्दशन आदि में ड्यूटी देने का अनुभव रखते हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने की गोपनीय रणनीति बनाई गई। शाम छह बजकर 34 मिनट पर टीपीएम (वायरलैस मैसेज) जारी कर दिया गया।
इस मैसेज में 21 डीसीपी व एडिशनल डीसीपी की जंतर-मंतर और आसपास ड्यूटी लगाने के आदेश किए गए। 8 संयुक्त पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त की ड्यूटी लगाई गई। भारी संख्या में पुलिस बलों को सुरक्षा के नाम पर शनिवार सुबह जंतर-मंतर पहुंचने के आदेश दिए गए। तय समय होते ही मंच को सफेद पर्दे से ढका गया और कुछ ही सेकेंडों में सोनम को वहां से हटा दिया गया। पुलिस का ये अरेंजमेंट 20 जुलाई तक रहेगा।
30 सेकेंड का दिया गया समय
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि टीम को बताया गया कि सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सिर्फ 30 सेकेंड के अंदर हटाया जाएगा। इस मिशन को पुलिस ने बखूबी अंजाम दिया। वांगचुक को हटाने से पहले इलाके में फोन जैमर लगा दिए गए थे ताकि लाइव स्ट्रीमिंग न की जा सके। सोनम को अस्पताल भेजने के दौरान हालात संभालने के लिए भारी संख्या में पुलिस अधिकारियों की तैनाती के अलावा भारी संख्या में पैरा-मिलिट्री फोर्स भी तैनात कर दी गई।
