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18 साल बाद अमेरिका छोड़ भारत लौटे Meta के इंजीनियरिंग लीडर, बोले- ‘अब परिवार को दूर से नहीं देखना था’

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सिलिकॉन वैली में शानदार करियर, दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों में नेतृत्व की भूमिका और अमेरिका में 18 साल की जिंदगी. यह सब छोड़कर Meta के इंजीनियरिंग लीडर बालाजी गुरुराजन ने भारत लौटने का फैसला किया. वजह नौकरी नहीं, बल्कि परिवार था. बालाजी का भावुक LinkedIn पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. हजारों लोग उनकी कहानी से खुद को जोड़ रहे हैं और इसे ‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ के बढ़ते ट्रेंड की एक मिसाल बता रहे हैं.

बालाजी ने लिखा, “18 साल बाद… एक महीने पहले मैं और मेरा परिवार अमेरिका में बिताए 18 साल समेटकर बेंगलुरु आ गए. हम अपने बुजुर्ग माता-पिता के करीब रहना चाहते थे, बच्चों को परिवार के बीच बड़ा होते देखना चाहते थे और जिंदगी के उस दौर को अब दूर से नहीं देखना चाहते थे.”

पोस्ट के साथ उन्होंने एयरपोर्ट की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें सामान से भरी ट्रॉली उनके जीवन के एक बड़े अध्याय के समापन की कहानी बयां कर रही थी.

‘सिलिकॉन वैली ने मुझे बहुत कुछ दिया’

बालाजी ने माना कि अमेरिका छोड़ना आसान फैसला नहीं था. उन्होंने Microsoft और LinkedIn जैसी कंपनियों में काम करने के बाद Meta में अपनी पहचान बनाई. उन्होंने लिखा, “अब भी यह पूरी तरह वास्तविक नहीं लगता. बे एरिया ने मुझे मेरा करियर दिया, मेरी सबसे करीबी दोस्तियां दीं और टेक्नोलॉजी व नेतृत्व के बारे में सोचने का ऐसा नजरिया दिया, जिसे मैं पूरी जिंदगी अपने साथ रखूंगा.”

भारत लौटकर फिर से शुरू हुई नई जिंदगी

भारत लौटने के बाद नई शुरुआत भी आसान नहीं रही. बच्चों के स्कूल, नया घर और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने खुद को फिर से एक नई जिंदगी में ढालना शुरू किया.

उन्होंने लिखा, “यह अपने आप में एक नया प्रोजेक्ट रहा है—स्कूल, घर और उस शहर में दोबारा बसने की रोजमर्रा की चुनौतियां, जिसे मैं कई साल पहले छोड़कर गया था. यह अनुभव विनम्र बनाने वाला रहा है और ज्यादातर समय बेहद अच्छा भी.”

Claude AI से बनाया नया ऐप

नई शुरुआत के बीच बालाजी ने एक साइड प्रोजेक्ट भी शुरू किया. उन्होंने Claude AI की मदद से Bhavitta नाम का एक ऐप बनाया है. यह उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो दो देशों, दो मुद्राओं और दो टैक्स सिस्टम के बीच अपनी वित्तीय योजना बनाते हैं या विदेश से भारत लौटने की तैयारी कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- ‘यही असली सफलता है’

बालाजी की पोस्ट पर हजारों प्रतिक्रियाएं आईं. एक यूजर ने लिखा, “बेंगलुरु आपको तकनीकी विकास की रफ्तार से जरूर चौंकाएगा. मैं 12 साल पहले लौटा था और यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा फैसला साबित हुआ.”

एक अन्य यूजर ने कहा, “ऐसा लगता है कि अब रिवर्स ब्रेन ड्रेन का दौर शुरू हो चुका है.”

सबसे ज्यादा चर्चा एक टिप्पणी की हुई, जिसमें लिखा था, “जब आप अपने माता-पिता के साथ बैठते हैं, उनकी आंखों में सुकून देखते हैं, तब बाकी सब चीजें पीछे छूट जाती हैं. यह वह खुशी है जिसे डॉलर से कभी नहीं खरीदा जा सकता.”

एक अन्य यूजर ने सलाह देते हुए लिखा, “भारत लौटने के बाद शुरुआती दो साल सबसे अहम होते हैं. एक-एक दिन आगे बढ़िए और परिवार का साथ बनाए रखिए.”

क्या बदल रही है भारतीय प्रोफेशनल्स की सोच?

बालाजी गुरुराजन की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के घर लौटने की नहीं है. यह उन हजारों भारतीय पेशेवरों की बदलती सोच को भी दिखाती है, जो अब केवल वैश्विक करियर नहीं, बल्कि परिवार, जीवन की गुणवत्ता और अपनेपन को भी उतनी ही अहमियत दे रहे हैं. भारत के तेजी से बढ़ते टेक इकोसिस्टम के बीच ऐसे फैसले अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आम होते जा रहे हैं.

पोस्ट के अंत में बालाजी ने सिर्फ एक लाइन लिखी, लेकिन उसी में उनके फैसले की पूरी भावना झलक गई—”फिलहाल, मैं आभारी हूं, थोड़ा जेट लैग्ड हूं और यहां आकर खुश हूं.”

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