श्री अमरनाथ जी की वार्षिक तीर्थयात्रा के पारंपरिक प्रतीक ‘छड़ी-मुबारक’ के इस वर्ष के कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। महंत दीपेंद्र गिरि ने साधुओं और आम जनता की जानकारी के लिए पूरा कार्यक्रम जारी किया है। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, इस पवित्र यात्रा की औपचारिक शुरुआत आगामी 29 जुलाई को ”आषाढ़-पूर्णिमा” (व्यास-पूर्णिमा) के पावन अवसर पर पहलगाम में भूमि-पूजन के साथ होगी।

महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि पहलगाम में होने वाले पारंपरिक अनुष्ठानों में भूमि-पूजन, नवग्रह पूजन और ध्वजारोहण शामिल हैं, जो बुधवार, 29 जुलाई को विधि-विधान से संपन्न किए जाएंगे। इसके बाद 12 अगस्त को छड़ी-मुबारक को श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर ले जाया जाएगा। 13 अगस्त को पवित्र छड़ी को शारिका भवानी मंदिर ले जाया जाएगा। 15 अगस्त को श्रीनगर के दशनामी अखाड़ा स्थित श्री अमरेश्वर मंदिर में छड़ी-स्थापना की रस्म अदा की जाएगी। 17 अगस्त को नाग-पंचमी के शुभ अवसर पर दशनामी अखाड़ा श्रीनगर में पारंपरिक रूप से पवित्र ”छड़ी-पूजन” संपन्न होगा।
महंत दीपेंद्र गिरि ने जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की सरकार को पत्र भेजकर सदियों पुरानी इन परंपराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने का आग्रह किया है। उन्होंने प्रशासन से छड़ी-मुबारक की यात्रा को तय समय सारणी के अनुसार सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाने तथा पवित्र छड़ी के साथ चलने वाले साधुओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व संरक्षा के लिए सभी निवारक उपाय सुनिश्चित करने को कहा है।
मुख्य यात्रा मार्ग और रात्रि विश्राम
मुख्य तीर्थयात्रा की शुरुआत 22 अगस्त 2026 को होगी। महंत दीपेंद्र गिरि पवित्र छड़ी को लेकर मुख्य गुफा के लिए रवाना होंगे। इस दौरान छड़ी-मुबारक विभिन्न पड़ावों पर रात्रि विश्राम करेगी। 22 और 23 अगस्त को पहलगाम में दो रातों का ठहराव होगा। 24 अगस्त को चंदनवाड़ी में रात्रि विश्राम किया जाएगा। 25 अगस्त को शेषनाग में रात्रि विश्राम होगा। 26 और 27 अगस्त को पंचतरणी में दो रातों का ठहराव होगा। इसके बाद 28 अगस्त को श्रावण-पूर्णिमा के पावन अवसर पर पवित्र अमरनाथ गुफा में अंतिम पूजन और मुख्य दर्शन संपन्न होंगे।
पंजीकरण अनिवार्य, बिना परमिट नहीं मिलेगी अनुमति
महंत ने यात्रा में शामिल होने के इच्छुक सभी साधुओं और नागरिक समाज के सदस्यों को समय पर पंजीकरण कराने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि तीर्थयात्रा के दौरान केवल उन्हीं साधुओं और श्रद्धालुओं को छड़ी-मुबारक के साथ चलने की अनुमति दी जाएगी, जिनके पास वैध यात्रा परमिट और पंजीकरण होगा। देशभर से आने वाले साधुओं के लिए महादेव गिर दशनामी अखाड़ा ट्रस्ट, श्रीनगर द्वारा पिछले वर्षों की तरह इस बार भी व्यापक प्रबंध किए गए हैं। श्रीनगर के बादशाह चौक स्थित अखाड़ा भवन में साधुओं के ठहरने और भोजन (लंगर) की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

