
आपको लगता है कि दुबई सिर्फ ऊंची-ऊंची इमारतों और शॉपिंग मॉल्स का शहर है, तो आप गलत हैं. दुबई की असली ताकत उसका जेबेल अली बंदरगाह है. यह मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर बंदरगाहों में से एक है. यहां से एशिया, अफ्रीका, यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच करोड़ों डॉलर का माल आता-जाता है. पिछले साल अकेले इस बंदरगाह ने 156 लाख कंटेनर यूनिट (TEUs) हैंडल किए. हालांकि, फारस की खाड़ी इसकी बड़ी कमजोरी है, क्योंकि यहां आने-जाने वाला हर जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है. इस वजह से दुबई ने नया पांसा फेंका है यानी फुजैरा पोर्ट. आखिर क्या है नया पोर्ट, होर्मुज के बगल में क्यों बन रहा और इससे क्या फायदा होगा…
दुबई की सबसे बड़ी कमजोरी: जेबेल अली पोर्ट
दुबई की अर्थव्यवस्था की जान उसका मशहूर जेबेल अली पोर्ट है. यह मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा और दुनिया के टॉप-10 बंदरगाहों में से एक है. दुनिया भर का सामान पहले यहां आता है और फिर यहां से पूरी दुनिया में जाता है. लेकिन इस बंदरगाह की एक बहुत बड़ी मजबूरी है कि यह फारस की खाड़ी के अंदर स्थित है. इसका मतलब यह है कि जेबेल अली तक पहुंचने के लिए हर जहाज को पहले होर्मुज स्ट्रेट से गुजरना पड़ता है.
होर्मुज एक बहुत संकरा समुद्री रास्ता है, जिस पर ईरान का बहुत ज्यादा कंट्रोल है. जब भी ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ता है, तो ईरान होर्मुज को बंद करने की धमकी देता है. पिछले दिनों अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान यह धमकी हकीकत बन गई थी और होर्मुज को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था. जब होर्मुज बंद हुआ, तो जेबेल अली पोर्ट दुनिया से पूरी तरह कट गया. यही वो कमजोरी है जिसे दुबई अब खत्म करना चाहता है.
फुजैरा पोर्ट: होर्मुज को बायपास करने वाला ‘प्लान बी’
इसी कमजोरी को दूर करने के लिए UAE ने फुजैरा के बंदरगाह को एक ‘मेगा पोर्ट’ में बदलने का फैसला किया. यह जिम्मा दुबई की पोर्ट ऑपरेटर कंपनी डीपी वर्ल्ड ने उठाया है. फुजैरा, UAE का वो इलाका है जो सीधे हिंद महासागर के किनारे पड़ता है. यहां से समुद्र में जाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोई जरूरत नहीं है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं ताकि फुजैरा पोर्ट, जेबेल अली का एक मजबूत विकल्प बन सके.
इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए बंदरगाह का मकसद सिर्फ माल ढोना ही नहीं है. यह एक बहुत बड़ा लॉजिस्टिक हब होगा, जहां तेल के भंडारण के लिए विशाल टर्मिनल होंगे. फुजैरा में पहले से ही तेल स्टोरेज का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है और इसे और बड़ा किया जा रहा है. विचार यह है कि खाड़ी देशों का तेल पाइपलाइन के जरिए पहले फुजैरा पहुंचाया जाए. फिर बिना होर्मुज में गए सीधे बड़े-बड़े टैंकरों के जरिए दुनिया भर में भेज दिया जाए.
इस प्रोजेक्ट की खास बातें:
- इसमें एक नया बहुउद्देश्यीय बंदरगाह और मौजूदा बंदरगाह पर एक नया कंटेनर टर्मिनल शामिल होगा.
- डीपी वर्ल्ड सरकारी अधिकारियों के साथ टर्म शीट (समझौता पत्र) पर बातचीत कर रहा है.
- एक वरिष्ठ कंपनी अधिकारी के मुताबिक, नई बंदरगाह 18 महीनों में पूरी हो सकती है.
- फुजैराह में पहले से ही 18 मिलियन क्यूबिक मीटर की भंडारण क्षमता है.
डीपी वर्ल्ड पहले से ही जेबेल अली से माल को फुजैराह और खोर फक्कान के पूर्वी तटीय बंदरगाहों पर रीरूट कर रहा है.
फुजैरा पोर्ट का बनना इतना जरूरी क्यों है?
एक्सपर्ट्स फुजैरा पोर्ट बनने की तीन बड़ी जरूरतें बताते हैं:
- होर्मुज का ‘इकोनॉमिक बम’ से बचाव: यह प्रोजेक्ट सीधे तौर पर ईरान के उस ‘इकोनॉमिक बम’ का जवाब है, जो वो होर्मुज को बंद करके बना सकता है. अगर भविष्य में कभी ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह और लंबे समय के लिए बंद कर दिया, तो दुबई की अर्थव्यवस्था चौपट न हो जाए, इसलिए यह ‘बाईपास सिस्टम’ तैयार किया जा रहा है. यह दुबई के लिए एक आर्थिक बीमा पॉलिसी की तरह है.
- तेल व्यापार की नई रीढ़: सिर्फ UAE ही नहीं, सऊदी अरब और अबू धाबी भी अपने तेल के निर्यात के लिए होर्मुज पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. सऊदी अरब ने पहले ही अपनी ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ बना रखी है, जो तेल को लाल सागर तक ले जाती है. अब अबू धाबी ने भी एक बहुत बड़ी पाइपलाइन बनाई है जो उसके तेल को सीधे फुजैरा पोर्ट तक लाती है. यानी, पूरा क्षेत्र अब होर्मुज का एक मजबूत विकल्प खड़ा करने में जुटा है. फुजैरा इसी रणनीति का सबसे अहम केंद्र बनने जा रहा है.
- पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए नई सप्लाई चेन: यह परियोजना UAE को होर्मुज के बाहर एक स्थायी और वैकल्पिक रसद गेटवे देगी. UAE सरकार पहले से ही फुजैराह, दिब्बा और खोर फक्कान के बंदरगाहों को विस्तारित करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही सड़क, रेलवे और पाइपलाइन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.
दुबई का दूरदर्शी दांव कितना कारगर होगा?
दुबई फुजैरा में यह नया मेगा पोर्ट सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि अपने पूरे आर्थिक भविष्य की सुरक्षा के लिए बना रहा है. यह एक ऐसी चाल है जो ईरान के होर्मुज पर कंट्रोल को बेअसर कर देगी. यह इस बात का सबूत है कि दुनिया अब होर्मुज की ‘बंधक’ नहीं बनना चाहती और एक ऐसा विकल्प तैयार कर रही है जो व्यापार और तेल की आपूर्ति को हर हाल में जारी रख सके. आने वाले समय में फुजैरा पोर्ट, जेबेल अली को टक्कर देने वाला नहीं, बल्कि खतरे के समय में उसकी जगह लेने वाला ‘इमरजेंसी दरवाजा’ बनकर उभरेगा.

