पीलीभीत के जिला अस्पताल के सीटी स्कैन कक्ष में पैरामेडिकल छात्रा कशिश पटेल की हत्या की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में 80 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और परिसर की निगरानी के लिए 88 सीसी कैमरे भी लगे हैं। इसके बावजूद आरोपी चाकू लेकर अस्पताल में दाखिल हुआ, दो बार सीटी स्कैन कक्ष तक पहुंचा और वारदात को अंजाम देने के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था की नींद टूटी।
जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्य प्रवेश द्वार, इमरजेंसी वार्ड, पर्चा काउंटर, दवा वितरण केंद्र, चिकित्सकों के कक्ष और सीटी स्कैन सहित विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर 80 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। कागजों पर यह व्यवस्था मजबूत दिखाई देती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है।
अस्पताल में पर्चा और दवा काउंटर पर मरीजों की सबसे अधिक भीड़ रहती है, लेकिन यहां अक्सर केवल एक-एक सुरक्षाकर्मी ही व्यवस्था संभालते दिखाई देते हैं। अन्य सुरक्षाकर्मी परिसर में इधर-उधर घूमते नजर आते हैं। वहीं इमरजेंसी वार्ड के भीतर और बाहर अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, जिनका अधिकांश समय मरीजों और तीमारदारों को गेट से हटाने में ही गुजरता है।
अस्पताल परिसर में पहले भी सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियां सामने आ चुकी हैं। यहां बाइक चोरी, मारपीट और नवजात के शव को कुत्ते द्वारा उठा ले जाने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि अब तक इस तरह की कोई बड़ी आपराधिक वारदात नहीं हुई थी। मंगलवार को सीटी स्कैन कक्ष में हुई हत्या की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया।
पुरुष और महिला अस्पताल परिसर को मिलाकर करीब 88 सीसी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें वर्तमान में करीब सात कैमरे खराब बताए जा रहे हैं। कैमरों की निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां दो सुपरवाइजरों की 24 घंटे ड्यूटी रहती है।
इसके बावजूद आरोपी की संदिग्ध गतिविधियां किसी की नजर में नहीं आ सकीं। घटना के दौरान न तो किसी सुरक्षाकर्मी ने उसकी गतिविधियों पर संदेह जताया और न ही समय रहते उसे रोका जा सका।