अहमदाबाद में जून 2025 में हुए एअर इंडिया के विमान हादसे की जांच कर रहा एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) अक्तूबर 2026 तक अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट का मसौदा (ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट) तैयार कर सकता है। यह जानकारी एएआईबी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में दी है।
छह सप्ताह में पूरी हो सकती है जांच
एएआईबी ने अदालत को बताया कि मौजूदा स्थिति के अनुसार, यदि सभी जरूरी बाहरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो जांच से जुड़े बाकी काम करीब छह सप्ताह में पूरे होने की संभावना है। इसके बाद सभी तथ्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अक्तूबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट का मसौदा तैयार कर लिया जाएगा।
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अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत हो रही जांच
एएआईबी ने कहा कि यह केवल भारत की आंतरिक जांच नहीं है, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय जांच है। यह जांच शिकागो कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के एनेक्स-13 के नियमों के अनुसार की जा रही है। इन नियमों के तहत विमान के पंजीकरण वाले देश, विमान संचालक देश, विमान के डिजाइन और निर्माण से जुड़े देशों को भी जांच में शामिल होने का अधिकार होता है। इसलिए यह पूरी प्रक्रिया कई देशों के सहयोग से तय अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार चल रही है।
जांच का उद्देश्य दोष तय करना नहीं
एएआईबी ने स्पष्ट किया कि विमान हादसे की जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना या आपराधिक अथवा दीवानी जिम्मेदारी तय करना नहीं है। जांच का मुख्य मकसद हादसे के कारणों का पता लगाना, भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना और विमानन सुरक्षा को बेहतर बनाना है।
कई दस्तावेज गोपनीय रहेंगे
इस हलफनामे में कहा गया है कि जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज कानून के तहत गोपनीय रखे जाते हैं। इनमें गवाहों के बयान, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की रिकॉर्डिंग और ट्रांसक्रिप्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल की बातचीत, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य संवेदनशील दस्तावेज शामिल हैं। एएआईबी का कहना है कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से न केवल मौजूदा जांच प्रभावित हो सकती है, बल्कि भविष्य की विमान दुर्घटना जांचों पर भी असर पड़ सकता है।
260 लोगों की हुई थी मौत
यह दर्दनाक हादसा 12 जून 2025 को हुआ था। एअर इंडिया की एआई-171 उड़ान अहमदाबाद से लंदन जा रही थी, लेकिन उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान रनवे के पास स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकरा गया था। इस हादसे में 229 यात्रियों, 12 चालक दल के सदस्यों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों सहित कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी।
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पायलट के पिता ने मांगी निष्पक्ष जांच
इस हादसे में जान गंवाने वाले पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल के 91 वर्षीय पिता पुष्कराज सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत जांच की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले सुनवाई के दौरान पायलट के पिता से कहा था कि उनके बेटे को इस हादसे के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है और उन्हें खुद को इसका बोझ नहीं देना चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि हादसे के सही कारणों का पता नहीं लगाया गया तो भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। साथ ही, याचिका में दावा किया गया है कि दुर्घटना के समय विमान का इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ईएलटी) भी सक्रिय नहीं हुआ था।


