Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 महीने की अलग-अलग केस में सजा सुनाई है. लेकिन अपने इस फैसले पर तुरंत अमल पर हाईकोर्ट ने दो महीने की रोक लगा दी है. इससे राजपाल यादव को दो महीने का और भी वक्त मिल गया है. हाईकोर्ट की ओर से बड़ी राहत इसलिए दी गई है ताकि वो हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती दे सकें.
राजपाल यादव के वकील भास्कर उपाध्याय क्या बोले?
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, राजपाल यादव के वकील भास्कर उपाध्याय ने चेक बाउंस मामले को लेकर हाईकोर्ट से मिला राहत को लेकर कहा, ‘अदालत ने अभी तक पूरी राहत नहीं दी है. फिलहाल, उन्हें दो महीने का विस्तार दिया गया है. हमें वास्तव में जो कहा गया है उसे समझने के लिए ऑर्डर शीट और फैसले की जांच करने की आवश्यकता है. तभी हम आपको ठीक से जानकारी दे पाएंगे.’
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कई मामले की कार्यवाही है…

राजपाल यादव के वकील ने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से की गई कार्यवाही कई मामलों की है. उन्होंने आगे जानकारी दी, ‘5 करोड़ रुपये में से हमने पहले ही लगभग 4.5 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं. हालांकि, समस्या इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि कई कार्यवाही हैं. एक मामले में, दावा लगभग 11 करोड़ रुपये का है, जबकि एक सिविल डिक्री है. लगभग 10.5 करोड़ रुपये के लिए. साथ ही, लगभग 11.5 करोड़ रुपये का एक आपराधिक मामला है, भले ही ये सभी कार्यवाही एक ही अंतर्निहित लेनदेन से संबंधित हैं.’ 
11 से 11.5 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी…
राजपाल यादव के वकील आगे कहते हैं, ‘इसलिए, इस अदालत के समक्ष जमा की गई राशि के संबंध में, विशेष रूप से हमारे द्वारा पहले जमा की गई राशि के संबंध में, न्यायाधीश ने फैसला सुनाया है कि हमने जो राशि जमा की थी, वह लगभग 2.5 करोड़ रुपये है, जिसे अब हमें लगभग 11 से 11.5 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा पहले निर्णय और आदेश दोनों की समीक्षा करने के बाद ही हम न्यायाधीश के तर्क और कानूनी निहितार्थों को समझा पाएंगे.’
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चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 7 अलग-अलग केस में तीन-तीन महीने की सजा सुनाई है. कोर्ट ने ये भी आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. इसलिए उन्हें कुल तीन महीने की सजा भुगतनी होगी. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने एक्टर द्वारा निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें पहले ही कई अदालत से कई अंडरटेकिंग दी जा चुकी हैं, जिसका उन्होंने पालन नहीं किया.
इतना ही नहीं, हाईकोर्ट की ओर से राजपाल यादव पर 1.05 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है. इस तरह से सात अलग मामलों को कुल जुर्माना 7.35 करोड़ बनता है. अदालत की ओर से कहा गया, हर मामले में 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार शिकायतकर्ता और 25 हजार राज्य को अदा किए जाएंगे.

