अमेरिका और ईरान के एक दूसरे पर हवाई हमले करने के बाद से पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ा हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान ने अपनी मध्यस्थता में हुए युद्धविराम को बचाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच ठप पड़ी वार्ता को फिर से शुरू कराने के लिए ईरान और कतर के शीर्ष नेताओं से अलग-अलग बातचीत की।
ईरान और कतर से पाकिस्तान ने लगाई गुहार
शुक्रवार रात हुई इन बातचीत का उद्देश्य हालिया तनाव और दोनों पक्षों के बीच हुए हमलों के बाद बिगड़े हालात को सामान्य बनाना तथा शांति प्रक्रिया को फिर से आगे बढ़ाना था। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बातचीत के दौरान शहबाज शरीफ ने क्षेत्र में हालिया तनाव बढ़ने पर गहरी चिंता जताई और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता की तत्काल बहाली की जरूरत पर जोर दिया। शरीफ ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत किए गए वादों का पालन करने की अपील की। शहबाज शरीफ ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से भी बात की।
अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम टूटा
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान ने 18 जून को पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के उद्देश्य से इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 21 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में तकनीकी स्तर की वार्ता हुई थी, जिसमें पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच का युद्धविराम लंबे समय तक नहीं टिक सका और हाल ही में अमेरिका ने फिर से ईरान पर हवाई हमले किए।
अमेरिका ने बताया कि ईरान ने समझौते का उल्लंघन किया और होर्मुज में व्यापारिक जहाजों पर हमले किए। हालांकि ईरान ने अमेरिका पर ही समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को मारने की साजिश रच रहा है। इसे लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है और अमेरिका ने ईरान को धमकी दे डाली है। हालांकि गनीमत है कि दोनों तरफ से हमले फिलहाल नहीं रहे हैं और होर्मुज पर भी गतिविधियां सामान्य हैं।
