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Iran-US War: मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव! अमेरिकी सेना का ईरानी रडार और मिसाइल ठिकानों पर बड़ा हमला

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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर हमला किया है, जिसके बाद मिडिल ईस्ट में हालात और गंभीर हो गए हैं. यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  में एक कार्गो जहाज पर हमले के बाद सीज़फायर का बेवकूफी भरा उल्लंघन करने का आरोप लगाया.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, शुक्रवार को ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों के साथ तटीय रडार पोजिशन पर हमला किया गया. अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई गुरुवार को कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में की गई. उस हमले के कारण इलाके में फंसे नाविकों को निकालने की योजना भी रुक गई थी. ईरान ने कार्गो जहाज पर हमले को सही ठहराते हुए कहा कि जहाज खाड़ी के जलमार्ग से गुजरने के लिए बिना अनुमति वाले रास्ते का इस्तेमाल कर रहा था.

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ईरान ने  अमेरिकी हमले को लेकर क्या कहा?

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया और अमेरिका पर अंतरिम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. ईरान का कहना है कि उसने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया. CENTCOM ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी हमले एक दिन पहले हुए ड्रोन अटैक का मजबूत जवाब हैं. अमेरिका का कहना है कि ईरान की सेना द्वारा कमर्शियल शिपिंग पर हमला सीज़फायर का साफ उल्लंघन है. साथ ही ईरान की आक्रामक कार्रवाई ने समुद्री व्यापार और नेविगेशन की स्वतंत्रता को भी खतरे में डाल दिया है. अमेरिका ने यह भी कहा कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के लिए मदद जारी रखेगा. ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार (27 जून 2026) की सुबह बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन किया है. ईरान ने इस पूरे संकट के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया.IRGC ने कहा कि उसकी नेवी ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, हालांकि ज्यादा जानकारी नहीं दी गई.

ईरानी ड्रोन से बहरीन पर किया गया हमला

बहरीन ने दावा किया कि शनिवार सुबह कई ईरानी ड्रोन ने उसके क्षेत्र को निशाना बनाया. बहरीन ने इसे अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया और ईरान पर शांति प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया. यूनाइटेड किंगडम मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशन ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ. जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, लेकिन सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं हुआ. फरवरी के आखिर में अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर कड़ा नियंत्रण शुरू कर दिया था. यह समुद्री रास्ता तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है. इसके प्रभावित होने से दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आया और जरूरी सामानों की सप्लाई भी प्रभावित हुई.

अमेरिका-ईरान के बीच 14-पॉइंट समझौते पर सहमती बनी

अमेरिका और ईरान 17 जून को 14-पॉइंट समझौते पर सहमत हुए थे. इसमें ईरान ने 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने का वादा किया था. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर ईरान को समझौते के लागू होने को लेकर कोई आपत्ति है तो बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच हमला किया है. उन्होंने कहा कि यह सीज़फायर का गंभीर उल्लंघन है और इसका जवाब दिया जाएगा. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान की हालिया कार्रवाई पसंद नहीं आई. उन्होंने कहा कि ईरान को ऐसा नहीं करना चाहिए था.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को मचा बवाल

हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया था कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी दिशा में बढ़ रही है और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने का विचार भी छोड़ दिया गया है. हालांकि ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने साफ कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संचालन अब पहले जैसा नहीं रहेगा.  कार्गो जहाज पर गुरुवार को हमला हुआ था. वह सिंगापुर का जहाज इवर लावली था. जहाज ओमान के दाहित पोर्ट के पास था जब उस पर हमला हुआ. जहाज मालिक कंपनी ने कहा कि जहाज तय रूट पर ही चल रहा था और सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं. इस हमले के बाद IMO ने 11,000 से ज्यादा नाविकों को निकालने की योजना रोक दी है, जो युद्ध शुरू होने के बाद मुख्य शिपिंग लेन में फंसे हुए हैं. फिलहाल मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है.

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