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सिंगापुर में भारतीय-बांग्लादेशी मजदूरों का हंगामा:महीनों से नहीं मिला वेतन, रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल – Uproar By Indian Bangladeshi Workers In Singapore No Wages Received For Months Meeting Daily Expense Difficult

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सिंगापुर में काम कर रहे भारत और बांग्लादेश के करीब 400 प्रवासी मजदूर इन दिनों मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं। इन मजदूरों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना भी चुनौती बन गया है।

कैसे सामने आया मामला?

यह मामला तब सामने आया जब करीब 100 मजदूरों ने सिंगापुर के श्रम मंत्रालय से शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद मंत्रालय ने केपीए इंजीनियरिंग और एसके इंडस्ट्रीज नाम की दो कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी। जांच शुरू होने के बाद और भी मजदूर सामने आए, जिससे प्रभावित कर्मचारियों की संख्या बढ़कर लगभग 400 तक पहुंच गई। जानकारी के मुताबिक, दोनों कंपनियों का संचालन एक ही डायरेक्टर से जुड़ा हुआ है। यह भी सामने आया है कि वह कई अन्य कंपनियों से भी संबद्ध है। इस बीच, कंपनियों के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

मजदूरों के पास खाना खाने तक के लिए नहीं है पैसे

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मजदूरों को खाना उपलब्ध कराने वाली कंपनियों ने भी भुगतान न मिलने के कारण सप्लाई रोक दी है। ऐसे में कई मजदूरों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया। राहत की बात यह है कि प्रवासी मजदूरों के लिए काम करने वाले कुछ गैर-सरकारी संगठन (NGO) आगे आए हैं और प्रभावित श्रमिकों को भोजन व अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।

माइग्रेंट वर्कर्स सेंटर ने दिया मदद का भरोसा

माइग्रेंट वर्कर्स सेंटर ने 300 से ज्यादा मजदूरों से मुलाकात कर उन्हें मदद का भरोसा दिया है। वहीं, अधिकारियों ने मजदूरों को सलाह दी है कि वेतन विवाद के निपटारे तक वे नई नौकरी तलाश सकते हैं। इसके लिए उन्हें विशेष पास भी दिया जा सकता है, जिससे वे कानूनी रूप से सिंगापुर में रह सकें।

आसान नहीं मजदूरों के लिए नई नौकरी पाना

हालांकि, श्रमिक अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि नई नौकरी पाना भी आसान नहीं है। कई मजदूर पहले ही भर्ती एजेंसियों को भारी फीस चुका चुके हैं और अब आर्थिक तंगी के कारण दोबारा एजेंसी शुल्क देने की स्थिति में नहीं हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि कई प्रवासी मजदूर भाषा, कानूनी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से हिचकते हैं। साथ ही उन्हें यह डर भी रहता है कि शिकायत करने पर उनका वर्क परमिट रद्द कर उन्हें वापस भेजा जा सकता है।

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मामले की जांच में जुटा श्रम मंत्रालय

फिलहाल सिंगापुर के श्रम मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां मजदूरों की शिकायतों की जांच कर रही हैं। श्रमिक संगठनों का कहना है कि जिन्होंने काम किया है, उन्हें उनका पूरा वेतन मिलना ही चाहिए और यह उनका अधिकार है, कोई एहसान नहीं।

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