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Explainer:ai के दौर में बढ़ते डेटा सेंटर क्यों बताए जा रहे पर्यावरण के लिए खतरा, भारत पर इसका कैसा होगा असर? – Why Are Growing Data Centres In The Ai Era Being Seen As An Environmental Threat, What Could It Mean For India

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भारत में कितनी तेजी से बढ़ रहा है डेटा सेंटर उद्योग?

भारत में डेटा सेंटर उद्योग लगातार विस्तार कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अनुसार, देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता 2020 में लगभग 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक बढ़कर करीब 1,500 मेगावाट हो गई है।

एआई विकास को समर्थन देने के लिए एआई कंप्यूट क्षमता ढांचे के तहत 14 सूचीबद्ध सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटरों के माध्यम से 38,231 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हें स्टार्टअप, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य पात्र उपयोगकर्ताओं को औसतन 65 रुपये प्रति घंटे की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। यह दर वैश्विक औसत लागत की लगभग एक-तिहाई है। ये डेटा सेंटर मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बंगलूरू, नोएडा और जामनगर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं।

सरकार का कहना है कि वह डेटा सेंटर इकोसिस्टम की जरूरतों, विशेष रूप से बिजली और पानी की मांग, को लेकर सजग है। एआई और बड़े डेटा सेंटरों के विस्तार से बढ़ने वाली बिजली मांग को सरकारी योजना प्रक्रिया में शामिल किया गया है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 2031-32 तक डेटा सेंटरों से बिजली की मांग 13.56 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।

इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय बिजली ट्रांसमिशन अवसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

हाल ही में संसद ने ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (SHANTI) अधिनियम पारित किया है। सरकार के अनुसार यह कानून छोटे मॉड्यूलर और माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टरों के भविष्य के विकास को समर्थन देगा, जिससे एआई और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराए जा सकेंगे।

भारत का डेटा सेंटर बाजार

आईएमएआरसी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय डेटा सेंटर बाजार का आकार  2025 में लगभग 5.55 अरब डॉलर आंका गया था, जो 2034 तक बढ़कर 13.11 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। 2026 से 2034 के बीच इस क्षेत्र में औसतन 10.01 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) रहने का अनुमान है।

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