पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में शुरू हुआ सियासी घटनाक्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले विधानसभा में विधायकों की बगावत, फिर कुछ राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा, इसके बाद लोकसभा सांसदों के गुट का रूठना सभी के सामने हैं। वहीं, बीते दिन खुद को असली टीएमसी बताने वाले ऋतब्रत बनर्जी के गुट की तरफ से पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी से अध्यक्ष पद से हटाना और पार्टी में दूसरे पद के नेता अभिषेक बनर्जी का निलंबन की भी खबर सामने आई। अब आज खुद ममता बनर्जी ने बागियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अरूप रॉय, फिरहाद हाकिम समेत आठ लोगों को पार्टी निष्कासित कर दिया है।

इन आठ नेताओं पर ममता की कार्रवाई
तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए नेताओं में जावेद अहमद खान, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा, सबीना यास्मीन, अरूप बिस्वास और स्नेहाशीष चक्रवर्ती शामिल हैं। इससे पहले टीएमसी ने इन सभी नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
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बागी गुट के गठन के बाद बढ़ा विवाद
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को पार्टी के भीतर नई संगठनात्मक संरचना बनाने का ऐलान किया था। बागी गुट ने एक विशेष बैठक आयोजित कर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस कमेटी और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एनडब्ल्यूसी) के गठन की घोषणा की थी। इस बैठक में अरूप रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था। इसके अलावा पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम को उपाध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की गई थी। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रथिन घोष, सबीना यास्मीन, जावेद खान और संदीपन साहा समेत कई नेताओं को शामिल किया गया था।
ममता को ‘मेंटर’ बनाने की बात
इस बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा था कि उनकी पार्टी ममता बनर्जी का सम्मान करती है और चाहती है कि वह संगठन में मेंटर और मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा था कि आने वाले दिनों में जिला अध्यक्षों और जिला समितियों का भी गठन किया जाएगा, ताकि संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत किया जा सके।
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बागी गुट की वैधता पर सवाल
इस बीच, ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को लेकर भी दोनों गुटों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी ने प्रतिद्वंद्वी गुट द्वारा लिए गए फैसलों की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि असली संगठन वही है, जिसे प्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त है। टीएमसी द्वारा आठ वरिष्ठ नेताओं को बाहर किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर चल रहा यह सत्ता संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।

