राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी के भारतीय जनता पार्टी में विलय की अटकलों पर पहली बार खुलकर बात की है। अमर उजाला के विशेष पॉडकास्ट ‘अनम्यूट भारत’ में उन्होंने स्वीकार किया कि भाजपा की ओर से पार्टी के विलय की सलाह जरूर मिली थी, लेकिन कभी किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया। बातचीत के दौरान उन्होंने जदयू के भविष्य, नीतीश कुमार की उत्तराधिकार की राजनीति, निशांत कुमार की भूमिका और बिहार के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर भी बेबाक राय रखी।
आरएलएम के भाजपा में विलय की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि भाजपा की ओर से विलय का सुझाव जरूर आया था, लेकिन इसे दबाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “लोगों ने सलाह के रूप में कहा कि पार्टी का विलय कर लीजिए। लेकिन वह कोई शर्त या दबाव नहीं था। सलाह तो बहुत लोग देते हैं, उसे मानना या नहीं मानना हमारे ऊपर है।” भाजपा से रिश्तों पर उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच किसी तरह की नाराजगी नहीं है। “न पहले नाराजगी थी, न अब है। परिवार में भी मतभेद होते हैं, लेकिन इसका मतलब रिश्ते खराब होना नहीं होता। भाजपा और हमारी पार्टी के बीच सब कुछ सामान्य है।”
नेतृत्व तैयार करने में चूके नीतीश कुमार
कभी जदयू के प्रमुख नेताओं में रहे उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हर बड़े नेता की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बाद नेतृत्व तैयार करे, लेकिन इस मामले में नीतीश कुमार चूक गए। उन्होंने कहा कि नीतीश जी बड़े नेता हैं। बिहार के विकास के लिए उन्होंने बहुत काम किया है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन अपने बाद कौन नेतृत्व करेगा, इसकी व्यवस्था करना उनकी जिम्मेदारी थी। इस मामले में जो करना चाहिए था, वह नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था। निजी बातचीत में नीतीश कुमार कई वर्षों से सक्रिय राजनीति के बाद राज्यसभा जाने जैसी इच्छा जताते रहे थे।
जदयू की मौजूदा हालत देखकर मन में दर्द होता है
समता पार्टी और जदयू के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कुशवाहा भावुक भी दिखे। उन्होंने कहा कि पार्टी को खड़ा करने में उन्होंने अपना खून-पसीना लगाया है, इसलिए आज उसकी स्थिति उन्हें परेशान करती है। उन्होंने कहा कि “उस पार्टी को बनाने में जी-तोड़ मेहनत की है। संघर्ष के दिनों में दिन-रात काम किया। इसलिए आज उसकी स्थिति देखकर मन में दर्द होता है। सबसे बड़ी चिंता यही है कि नीतीश जी के बाद पार्टी उसी रूप में कैसे चलेगी।”
निशांत कुमार को पहले ही राजनीति में लाना चाहिए था
नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की राजनीति में संभावित भूमिका पर भी कुशवाहा ने अपनी पुरानी सलाह दोहराई। उन्होंने कहा कि “मैंने करीब दो साल पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर उन्हें राजनीति में लाना है तो शुरुआत में ही लाना चाहिए था। मेरी राय थी कि उन्हें सीधे डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी देकर नेतृत्व के लिए तैयार किया जाना चाहिए था।”
महिला आरक्षण पर कोटे के भीतर कोटा की पैरवी
महिला आरक्षण के मुद्दे पर आरएलएम अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी ‘कोटे के भीतर कोटा’ की समर्थक है। उन्होंने कहा कि ओबीसी, ईबीसी, एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, तभी सामाजिक न्याय का उद्देश्य पूरा होगा।
तेजस्वी को दी नसीहत, चिराग पर भी टिप्पणी
तेजस्वी यादव के बारे में पूछे जाने पर कुशवाहा ने कहा कि उन्हें अपने व्यवहार और राजनीतिक कार्यशैली में सुधार करना चाहिए। वहीं, चिराग पासवान पर उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पिता रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत संभाली है, लेकिन उनके राजनीतिक संस्कारों में अभी और परिपक्वता आने की जरूरत है।

