- चीन अमेरिकी वर्चस्व विरोधी देशों को इसमें जोड़ेगा।
फ्रांस के एवियन में हाल ही में दुनिया के सबसे अमीर देशों के संगठन G7 के नेताओं का जमावड़ा लगा. इस बैठक में अमेरिका, फ्रांस, भारत, इटली समेत दुनिया के कई शीर्ष अमीर देशों के नेता शामिल हुए. हालांकि, इस महाबैठक में शामिल होने के लिए चीन को न्योता नहीं भेजा गया था. जिसकी वजह चीन पूरी तरह से बौखला गया है और इसी बौखलाहट में चीन ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है.
चीन ने घोषणा की है कि वह अपने खुद का एक अलग ग्लोबल समूह बनाने जा रहा है और इस वैश्विक समूह का नाम ‘ग्लोबल एआई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन’ रखा जाएगा. बीजिंग की तरफ से की गई घोषणा के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि चीन के इस नए वैश्विक समूह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग दुनिया के किन देशों को न्योता भेजने वाले हैं?
चीनी विदेश मंत्री ने क्या कहा?
चीन की राजधानी बीजिंग में बुधवार (17 जून, 2026) को स्टेट काउंसिल इंफोर्मेशन ऑफिस की तरफ से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की स्थापना के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर रहा है और हम एआई के जरिए भलाई के दिशा में कदम बढ़ाने और इस समूह में शामिल होने के लिए सभी का स्वागत करते हैं.
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चीन अब पूरी दुनिया की कमान को अपने हाथ में लेने की तैयारी कर चुका है और ग्लोबल एआई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के जरिए कई देशों के साथ एक अलग समूह बनाना चाहता है.
नए ग्रुप में दुनिया के किन देशों को शामिल करेगा चीन?
चाइना डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के सीक्रेट प्लान से भड़के चीनी राष्ट्रपति राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस नए वैश्विक समूह को लेकर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उन विकसित और विकासशील देशों पर दांव लगा रहे हैं, जिन्हें पश्चिमी देशों के रहम पर छोड़ दिया जाता है.
इसके साथ ही, चीन के नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन के उप-प्रमुख जाऊ हैबिंग ने कहा कि इस ग्रुप को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स देशों और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का भी इस्तेमाल किया जाएगा. ऐशे में हो सकता है कि चीन की ओर से बनाए जा रहे इस ग्रुप में रूस और ईरान जैसे देश भी नजर आएंगे.
इसके अलावा, चीन की तरफ से दुनिया के उन सभी देशों से शामिल होने के लिए खुले तौर पर कहा गया है, जो अमेरिका की दादागिरी से परेशान हैं. जिसके जरिए चीन अमेरिका के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक मजबूत मोर्चा तैयार कर सके.
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