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कौन हैं Cjp प्रवक्ता सौरव दास और अभिषेक रांका?:एक ने की पत्रकारिता की पढ़ाई, दूसरा Iit कानपुर से बना इंजीनियर – Who-are-cjp-spokespersons-saurav-das-and-ashutosh-ranka-profile-education-career

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर हुआ छात्रों का प्रदर्शन शनिवार को खत्म हो गया। केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने तीसरे दौर की वार्ता में सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल में शामिल सौरव दास और अभिषेक रांका ने मुलाकात की। इस बैठक के बाद सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने एलान किया कि केंद्र सरकार ने सीजेपी की सभी मांगें मान ली है।

केंद्र सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को मुआवजे और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज कानूनी मामले वापस लेने जैसी मांगों पर सैद्धांतिक सहमति जताई गई। आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि इन सभी मुद्दों की प्रगति का समीक्षात्मक आंकलन करने के लिए सीजेपी की टीम अब एक महीने बाद सरकार के साथ फिर से बैठक करेगी।  

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में अभिजीत दीपके के साथ सौरव दास और अभिषेक रांका उन प्रमुख चेहरों में शामिल रहे, जो सीजेपी के प्रवक्ताओं के तौर पर आंदोलन की आवाज बने। आइए जानते हैं कि कौन हैं सीजेपी के प्रदर्शन की पर्दे के पीछे से कमान संभालने वाले सौरव दास और अभिषेक रांका…

कौन हैं सौरव दास? 

सीजेपी के शुरुआती प्रदर्शन से लेकर सरकार के साथ बातचीत के दौरान सौरव दास का चेहरा लगातार सुर्खियों में बना रहा। सीजेपी से जुड़ने से पहले सौरव दास को लोग उनकी खोजी पत्रकारिता और सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता के तौर पर जानते थे। सौरव दास की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वे स्वतंत्र खोजी पत्रकार के तौर पर कानून, शासन, न्यायपालिका, अपराध और पारदर्शिता जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग करते रहे हैं। वह जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाले क्लाइमेट एक्शन फ्रंट के सह-संस्थापक भी हैं।

कहां से की पत्रकारिता की पढ़ाई?

सौरव दास ने एमिटी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई की। 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत सरकारी संस्थानों से जानकारी हासिल करना शुरू किया। आरटीआई के जरिए जनहित के मुद्दों पर उनके कई खुलासों को अलग-अलग समाचार माध्यमों में जगह मिली। साल 2020 में उन्होंने पेशेवर लेखन की शुरुआत की।

उनकी प्रोफाइल के अनुसार, सौरव दास के काम का प्रमुख विषय पारदर्शिता और सूचना तक पहुंच रहा है। पत्रकारिता से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त करने में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए उन्होंने कई बार कानूनी हस्तक्षेप भी किया।

कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने सूचना संबंधी अपीलों में हो रही देरी को लेकर एक राज्य के हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

किताब भी लिख रहे हैं सौरव दास

उनका दावा है कि इस पहल के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने महामारी से जुड़े जरूरी मामलों की अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज की थी। सौरव दास को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़ने के बाद बड़े स्तर पर पहचान मिली। इस दौरान उन्होंने छात्रों के मुद्दों, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए। 

सौरव दास अपनी पहली पुस्तक “कॉम्प्लिसिट साइलेंस: द कोर्ट्स रोल इन इंडिया’ज़ क्वाइट सफरिंग” पर काम कर रहे हैं। यह पुस्तक कानूनी व्यवस्था और संस्थागत कार्यप्रणाली से जुड़े कई सवालों की भी पड़ताल करती है। 

कौन हैं आशुतोष रांका? 

सीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल आशुतोष रांका सार्वजनिक नीति (पब्लिक पॉलिसी) के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। आशुतोष रांका ने प्रबंधन सलाहकार (मैनेजमेंट कंसल्टेंट) का काम भी किया है। 

आईआईटी कानपुर से की इंजीनियरिंग की पढ़ाई

राजस्थान के जयपुर के रहने वाले आशुतोष रांका ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की।

इसके बाद उन्होंने लंदन में मैकिन्जी एंड कंपनी में प्रबंधन सलाहकार के रूप में काम किया। कुछ वर्षों तक कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने के बाद वह भारत लौट आए। आशुतोष रांका ने सार्वजनिक नीति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया।

नीति निर्माण और सामाजिक अभियानों से जुड़ाव

आशुतोष रांका सार्वजनिक नीति और सुशासन से जुड़े कई प्रयासों का हिस्सा रहे हैं। वह आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान दिल्ली सरकार में एसोसिएट फेलो के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनका काम मुख्य रूप से सार्वजनिक नीति, नागरिक भागीदारी और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा है। हाल के वर्षों में उन्होंने राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और युवा कल्याण जैसे विषयों पर कई अभियानों में भाग लिया।

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