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Meta, X और Youtube कैसे हटाते हैं पोस्ट और वीडियो:किस नियम के तहत होता है कंटेंट पर एक्शन, समझिए पूरा सिस्टम – Pm Modi Video Removed Facebook Meta X Youtube Content Moderation Policies Explained

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट सेंसरशिप का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। हाल ही में फेसबुक (मेटा) से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न सिर्फ मेटा से स्पष्टीकरण मांगा है, बल्कि माफी और जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।

इस घटना ने एक बड़े सवाल को जन्म दिया है कि आखिर अमेरिका में बैठे इन टेक दिग्गजों (मेटा, एक्स, यूट्यूब) के दफ्तरों में यह कैसे तय होता है कि दुनिया के किसी हिस्से में कौन सा कंटेंट सही है और कौन सा गलत? आइए गहराई से समझते हैं कि सोशल मीडिया का यह ‘कंटेंट मॉडरेशन’ (Content Moderation) सिस्टम काम कैसे करता है।




pm modi video removed facebook meta x youtube content moderation policies explained

सेंसेटिव कंटेंट (सांकेतिक)
– फोटो : एआई जनरेटेड


कैसे होती है गलत कंटेंट की पहचान?

हर मिनट इन प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों की संख्या में टेक्स्ट, वीडियो और तस्वीरें अपलोड होती हैं। इन पर नजर रखने के लिए कंपनियां एक जटिल थ्री-टीयर (Three-tier) प्रणाली का इस्तेमाल करती हैं:

1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

सबसे पहला और सबसे बड़ा काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम करते हैं।

कंपनियों का दावा है कि नग्नता, बाल यौन शोषण, चरमपंथी हिंसा या कॉपीराइट उल्लंघन से जुड़ा 90% से ज्यादा कंटेंट इंसानों की नजर में आने से पहले ही एआई द्वारा पकड़कर डिलीट कर दिया जाता है।

ये एआई सिस्टम खास तरह के कीवर्ड्स, विवादित तस्वीरों और हैशटैग्स को पहचानने के लिए विशेष रूप से ट्रेन किए जाते हैं।

2. ह्यूमन रिव्यू टीम

एआई बहुत स्मार्ट है, लेकिन वह संदर्भ, व्यंग्य, या क्षेत्रीय भाषाओं की बारीकियों को नहीं समझ पाता।

यहीं पर ‘ह्यूमन रिव्यू टीम’ काम आती है। जब एआई किसी पोस्ट को लेकर कन्फ्यूज होता है या कोई यूजर किसी पोस्ट की शिकायत करता है, तो वह इंसानी रिव्यूअर्स के पास जाती है।

मेटा और गूगल जैसी कंपनियों ने दुनिया भर में हजारों कर्मचारियों और थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर्स को काम पर रखा है, जो स्थानीय भाषाओं और संस्कृति को समझते हैं। ये लोग कंपनी की ‘कम्युनिटी गाइडलाइंस’ के आधार पर फैसला लेते हैं।

3. सरकारी आदेश और कानूनी नोटिस

कई बार कंटेंट न तो एआई पकड़ता है और न ही आम यूजर, बल्कि सरकारें सीधे दखल देती हैं। भारत में आईटी नियम, 2021 के तहत, अगर सरकार या अदालत किसी कंटेंट को भ्रामक, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाला मानती है, तो वह सीधे इन कंपनियों को उसे हटाने का कानूनी आदेश जारी कर सकती है। कंपनियों को तय समय सीमा (अक्सर 36 घंटे) के भीतर इसे हटाना होता है।


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कंपनियों की हैं अलग-अलग नीतियां
– फोटो : Meta


कंपनियों की हैं अलग-अलग नीतियां

सभी प्लेटफॉर्म्स का मूल ढांचा एक जैसा है, लेकिन कंटेंट मॉडरेशन को लेकर उनकी नीतियों में अंतर है:

मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम):

मेटा अपनी ‘कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स’ का सख्ती से पालन करने का दावा करता है। इसमें हेट स्पीच, बुलिंग, और भ्रामक जानकारी को रोकने के कड़े नियम हैं। हालांकि, राजनीतिक विज्ञापनों और नेताओं के बयानों को लेकर इसकी नीतियां अक्सर विवादों में रही हैं। मेटा के पास एक स्वतंत्र ‘ओवरसाइट बोर्ड’ भी है, जो विवादित कंटेंट पर कंपनी के फैसलों को पलट सकता है। इसे फेसबुक का सुप्रीम कोर्ट भी कहा जाता है।

यूट्यूब (गूगल):

यूट्यूब वीडियो कंटेंट के लिए ‘कम्युनिटी गाइडलाइंस’ फॉलो करता है। हाल ही में यूट्यूब ने अपनी नीति में एक बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के तहत, अगर किसी वीडियो में भड़काऊ या नियमों का उल्लंघन करने वाला कंटेंट है, लेकिन वह यदि जनहित या किसी बड़े राजनीतिक/सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा है, तो यूट्यूब उसे नहीं हटाएगा, बल्कि उस पर चेतावनी लगा सकता है।

एक्स (पूर्व में ट्विटर):

एलन मस्क के टेकओवर के बाद एक्स की कंटेंट मॉडरेशन नीति में भारी बदलाव आया है। मस्क ने खुद को ‘फ्री स्पीच एब्सोल्यूटिस्ट’ करार देते हुए सेंसरशिप को काफी कम कर दिया है। एक्स ने कंटेंट हटाने के बजाय ‘कम्युनिटी नोट्स’ फीचर पेश किया है, जहां यूजर्स खुद किसी भ्रामक पोस्ट के नीचे फैक्ट-चेक (तथ्यात्मक जानकारी) जोड़ सकते हैं।

 


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अपील का भी मिलता है मौका
– फोटो : Adobe Stock


अपील का भी मिलता है मौका

अगर किसी यूजर का पोस्ट या वीडियो हटा दिया जाता है, तो अधिकांश प्लेटफॉर्म अपील की सुविधा देते हैं। Meta, YouTube और X पर यूजर समीक्षा का अनुरोध कर सकता है। यदि जांच में पता चलता है कि कंटेंट गलती से हटाया गया था, तो उसे दोबारा बहाल भी किया जा सकता है।

पीएम मोदी के वीडियो का विवाद क्यों अहम है?

पीएम मोदी के वीडियो को हटाए जाने की घटना इसलिए गंभीर है क्योंकि यह सवाल उठाती है कि क्या विदेशी टेक कंपनियों के एल्गोरिदम या ह्यूमन रिव्यूअर्स के पास भारतीय राजनीतिक संदर्भ को सही ढंग से समझने की क्षमता है? जब किसी देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक कंटेंट बिना स्पष्टीकरण के हटा दिया जाता है, तो यह डिजिटल संप्रभुता और इन प्लेटफॉर्म्स की मनमानी शक्तियों पर भी एक बड़ी बहस छेड़ देता है। 


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