तुगलकाबाद एक्सटेंशन में शुक्रवार को पांच मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने सिर्फ मकानों को नहीं जलाया, बल्कि दर्जनों परिवारों की वर्षों की मेहनत, सपनों और उम्मीदों को भी राख में बदल दिया। जिन लोगों ने एक-एक सामान जोड़कर अपना घर बसाया था, वे आज रिश्तेदारों और परिचितों के सहारे जिंदगी दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। किसी के पास रहने की जगह नहीं बची, किसी के बच्चों के कपड़े और किताबें जल गईं, तो किसी की पूरी जमा-पूंजी और जरूरी दस्तावेज आग की भेंट चढ़ गए।

