पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POJK), जिसे वह ‘आजाद कश्मीर’ कहता है, लेकिन असलियत कुछ और ही निकलकर सामने आई है. यहां आम लोगों का गुस्सा अब 7वें आसमान पर है. महंगाई, बेरोजगारी और बिजली बिलों से परेशान लोग सड़कों पर उतरे तो पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं. रावलकोट, गिलगिट-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद और मीरपुर जैसे इलाकों में हर तरफ सिर्फ चीखें और मातम पसरा है. इंटरनेट ठप, फोन लाइनें बंद और अस्पतालों में घायलों की भरमार. अब यह मामला यूनाइटेड नेशंस (UN) तक पहुंच चुका है. भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए UN से दखल देने की मांग की है और फारुक अब्दुल्लाह ने भी चुप्पी तोड़ते हुए जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई है…
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
POJK में यह विवाद 5 जून 2026 से शुरू होता है. POJK प्रशासन ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) नाम के एक नागरिक समूह पर प्रतिबंध लगा दिया. JAAC पिछले दो साल से लगातार महंगाई, बिजली कटौती और आटे के बढ़ते दामों के खिलाफ आवाज उठा रहा था. उनकी कुल 38 मांगें थीं. प्रशासन ने उनमें से 37 मान भी ली थीं, लेकिन एक मांग पर पत्थर की लकीर खींच दी और वो थी 12 शरणार्थी सीटों को खत्म करने की मांग.
ये सीटें 1947 में भारत से पाकिस्तान गए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं. JAAC का कहना है कि इन सीटों का इस्तेमाल पाकिस्तान अपने कठपुतलियों को विधानसभा में बैठाने के लिए करता है. जैसे ही JAAC पर प्रतिबंध लगा, लोग भड़क गए. 6 जून को एक व्यापारी की पुलिस झड़प में मौत हो गई और फिर ज्वालामुखी फूट पड़ा.
रावलाकोट का काली रात का किस्सा
यह वह रात थी जिसने POJK के इतिहास में काला किस्सा जोड़ दिया. 8 जून को रावलाकोट में JAAC समर्थकों ने बड़ा प्रदर्शन किया. वहां पाकिस्तानी रेंजर्स पहले से तैनात थे. देखते ही देखते सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.
आरोप है कि गोलियां सिर्फ हवा में नहीं, बल्कि सीधे लोगों के सीने पर चलाई गईं. कई लोग तो अपने घरों में सो रहे थे, उन पर भी गोलियां बरसीं. अस्पतालों पर कब्जा कर लिया गया, ताकि घायलों के बारे में पता न चले. मोबाइल इंटरनेट और फोन लाइनें एक साथ बंद कर दी गई. POJK अंधेरे और सन्नाटे में डूब गया.
کشمیر جو کبھی ہماری شہ رگ کہلاتا تھا، آج آزاد جموں و کشمیر میں اسی زمین پر ریاستی جبر کے مناظر دیکھے جا رہے ہیں۔
راولاکوٹ رینجر کی گولی سے شہید ہونے والے سبحان کشمیری کی نمازِ جنازہ کے بعد ہزاروں افراد نے سڑکوں پر نکل کر شدید احتجاج کیا۔#کشمیر_کی_آواز_بند_نہ_کرو… pic.twitter.com/R0QQuXwYTp
— PTI Central Punjab (@PTIOfficialCP) June 11, 2026
इस हमले में कितने लोग मारे गए?
गोलीबारी में सटीक मृत लोगों की संख्या की बात करें तो जवाब मुश्किल है, क्योंकि जब मीडिया बंद हो जाता है, तो सच्चाई की तस्दीक करना बेहद मुश्किल होता है. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- पाकिस्तान प्रशासन का आधिकारिक बयान: इस हमले में 7 नागरिक और 4 पुलिसकर्मी समेत 11 लोग मारे गए, जबकि 70 से ज्यादा लोग घायल बताए गए.
- JAAC और स्थानीय सूत्रों का दावा: मृतकों की संख्या 27 से ज्यादा है और 200 से ज्यादा घायल हैं. JAAC ने यह भी कहा कि रेंजर्स ने घरों में घुसकर लोगों को गोली मारी.
- इंटेलिजेंस डोजियर: एक गुप्त खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, 26 लोग मारे गए हैं, जिनमें 19 बच्चे और 7 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं. यह रिपोर्ट पाकिस्तान के भीतर ही तैयार हुई थी, लेकिन जब यह बाहर आई तो हड़कंप मच गया.
- इंटरनेशनल मीडिया की रिपोर्ट्स: रॉयटर्स ने 11 मौतों की पुष्टि की है, जबकि AFP ने 7 लोग मृत बताए हैं. लेकिन द वीक और द हितवाड़ा जैसी भारतीय वेबसाइट ने 30 के करीब मरने वालों का अनुमान लगाया है.
इतना तो साफ है कि यह पिछले कई सालों में POJK में हुई सबसे बड़ी हिंसा है. जब तक कम्युनिकेशन बहाल नहीं होता, असली तस्वीर सामने नहीं आएगी.
POJK हिंसा पर भारत और पाकिस्तान सरकार ने क्या कहा?
कश्मीर के दिग्गज नेता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ‘पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है. वहां अत्याचार हो रहे हैं. अब तक बहुत सारे लोग शहीद हो चुके हैं. मैं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से अपील करूंगा कि वह वहां जाकर देखे कि उन लोगों पर क्या मुसीबतें टूट रही हैं. बातचीत का रास्ता ही इकलौता हल है.’
फारुक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि POJK की जनता का दर्द बिल्कुल असली है और उसे नजरअंदाज करना पाकिस्तान के लिए आत्मघाती साबित होगा. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तानी मीडिया वहां के हालात को ‘नॉर्मल’ बताने की कोशिश में लगा है.
#WATCH | Srinagar, J&K: On protests in PoK, National Conference President, Farooq Abdullah says, “This state is in a difficult situation. The part that is with Pakistan is where oppression is happening today. Many people have been martyred there. Full details of the news are not… pic.twitter.com/gEAea7Gla3
— ANI (@ANI) June 11, 2026
POJK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर के बयानों में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है:
- 6-7 जून को राठौर ने JAAC को ‘गैर-सियासी और देशद्रोही’ ग्रुप बताया और उसके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए. उन्होंने कहा, ‘अब बातचीत नहीं होगी.’
- फिर 9 जून को जैसे ही अंतरराष्ट्रीय दबाव बना और मरने वालों की संख्या बढ़ी, तो राठौर ने पलटी मारी. उन्होंने कहा, ‘हम JAAC के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. 12 सीटों का मसला जानलेवा नहीं है. आइए, बैठें और बात करें.’
यहां एक अहम बात है. असली ताकत POJK की सरकार में नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के पास है. पाकिस्तान के केंद्रीय मंत्री अत्ता तारड़ ने साफ कर दिया कि ‘प्रदर्शनकारियों के इरादे खराब हैं और उनसे समझौता नहीं किया जा सकता’ यानी POJK के PM की बातचीत की पेशकश पर पानी फिर गया.
भारत ने UN से क्या मांग की?
भारत ने इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है. कश्मीरी कार्यकर्ता जावेद बेग ने संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) को एक ज्ञापन सौंपा. इसमें कहा गया, ‘पाकिस्तान रावलाकोट में राज्य आतंक को अंजाम दे रहा है.’ ज्ञापन में मांग की गई है कि UN तुरंत स्वतंत्र जांच कराए.
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘हम POJK में पुलिस बर्बरता की गंभीर रिपोर्ट्स देख रहे हैं. कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. पाकिस्तान फर्जी वीडियो और झूठे प्रोपेगेंडा का सहारा ले रहा है. यह उसकी नाकामियों को छिपाने की हताश कोशिश है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान को उसके मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए.’
भारत का साफ संदेश है कि पाकिस्तान अपने ही लोगों को मार रहा है और फिर उसे ‘भारतीय षड्यंत्र’ करार दे रहा है. भारत चाहता है कि दुनिया की नजर POJK के असली चेहरे पर पड़े.
पाकिस्तान की करतूत पर दुनिया क्या कह रही है?
- ब्रिटेन: ब्रैडफोर्ड शहर में पाकिस्तानी कॉन्सुलेट के बाहर बड़े प्रदर्शन हुए. लगभग 30 ब्रिटिश सांसदों ने अपनी सरकार से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की मांग की है.
- पाकिस्तान की ह्यूमन राइट्स कमीशन: HRCP ने बयान जारी कर कहा कि वह POJK की हिंसा से बड़ा झटका लगा है और JAAC पर आतंकी कानून लगाना बर्बरता है.
- एमनेस्टी इंटरनेशनल: पाकिस्तानी सेना के ‘बड़े पैमाने पर दमन’ की कड़ी आलोचना की है.
- अमेरिका: वहां रहने वाले कश्मीरी कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर हमला बोलते हुए कहा कि ट्रंप और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की दोस्ती कश्मीरियों के लिए मुसीबत बन गई है.
पाकिस्तानी सेना का ‘क्रश एंड एलिमिनेट’ ऑर्डर
सबसे डरावनी खबर यह है कि पाकिस्तानी सेना ने JAAC नेताओं को ‘क्रश एंड एलिमिनेट’ (कुचलो और खत्म करो) के आदेश दिए हैं. 14,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी POJK में तैनात किए जा चुके हैं. JAAC के चार मुख्य नेताओं के सिर पर 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपए (करीब 30 लाख भारतीय रुपए) का इनाम रखा गया है. मीडिया ब्लैकआउट जारी है यानी न कोई टीवी चैनल, न इंटरनेट और न मोबाइल नेटवर्क.
क्यों है यह मामला इतना अहम?
पहली बात तो यह कि POJK 27 जुलाई 2026 को चुनाव होने वाले हैं. 12 शरणार्थी सीटों का सवाल सीधे चुनावी समीकरण बदल सकता है. यही वजह है कि पाकिस्तानी सेना कोई समझौता नहीं करना चाहती.
दूसरी बात इसी POJK से होकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) गुजरता है. अगर यहां विद्रोह फैलता है, तो चीन की अरबों डॉलर की परियोजना खतरे में पड़ जाएगी. यही कारण है कि चीन अब तक चुप है, लेकिन उसकी निगाहें इसी तरफ हैं.
स्थिति अभी नाजुक बनी हुई है. JAAC ने 11 जून को फिर से मार्च का एलान किया है. पाकिस्तानी सेना ने मार्च के रास्तों पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं. यह टकराव कितना और खूनी होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि POJK में जो चुप्पी है, वह तूफान से पहले वाली चुप्पी है.


