
रूसी तेल कंपनी Rosneft के सीईओ इगोर सेचिन ने भारत को लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी की है. उन्होंने कहा है कि आने वाले एक दशक में दुनिया में जितनी भी नई तेल मांग बढ़ेगी, उसका लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से आएगा. यानी भारत धीरे-धीरे ग्लोबल एनर्जी मार्केट का सबसे बड़ा ड्राइविंग फोर्स बन सकता है.
भारत क्यों बनेगा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता?
इगोर सेचिन के मुताबिक भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ती आबादी, शहरीकरण और वाहन उपयोग में वृद्धि इसके मुख्य कारण हैं. उन्होंने बताया कि 2035 तक भारत का तेल खपत लगभग 44% बढ़कर करीब 8 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है. उनका कहना है कि विकासशील देशों में ऊर्जा की मांग सबसे तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन इनमें भारत सबसे आगे है. इसलिए आने वाले वर्षों में ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारत की भूमिका और भी अहम हो जाएगी.
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वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव

Rosneft CEO ने यह भी संकेत दिया कि दुनिया का ऊर्जा ढांचा बदल रहा है. विकसित देशों में तेल की मांग स्थिर या धीमी हो सकती है, लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों में मांग तेजी से बढ़ेगी. इसी वजह से ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ का बड़ा हिस्सा भारत से जुड़ जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत सिर्फ तेल उपभोक्ता ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है.
रूस-भारत ऊर्जा साझेदारी का बढ़ता असर
सेचिन ने यह भी बताया कि रूस से भारत को मिलने वाले तेल सप्लाई ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत किया है. 2022 के बाद से भारत और चीन को सस्ते रूसी तेल से अरबों डॉलर का फायदा हुआ है. इससे यह साफ होता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार अब सिर्फ सप्लाई और डिमांड का खेल नहीं रहा, बल्कि इसमें भू-राजनीति की भूमिका भी काफी बढ़ गई है.
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आने वाले समय में क्या चुनौती होगी?
हालांकि भारत के लिए यह ग्रोथ एक अवसर है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी हैं. तेल की बढ़ती मांग का मतलब है कि देश की आयात निर्भरता और बढ़ सकती है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊपर जाती हैं तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर पड़ेगा. विशेषज्ञों के अनुसार भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी और वैकल्पिक ईंधन पर भी तेजी से काम करना होगा.