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विश्व पर्यावरण दिवस:मौसम का बदल रहा मिजाज, 124 साल में पहली बार रिकॉर्ड तोड़ बढ़ा तापमान; पढ़ें पूरी रिपोर्ट – World Environment Day: Weather Changes, Temperature Rises To Record High For 1st Time In 124 Years; Cse Report

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देशभर में कटते जंगल और घटते भूजल स्तर से पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है। प्राकृतिक असंतुलन का ही नतीजा है कि 2025 को भारत ने अपने आठवें सबसे गर्म वर्ष के तौर पर दर्ज किया। इस वर्ष औसत तापमान 1991-2020 के दीर्घकालीन औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। जनवरी-फरवरी और मार्च-मई के मौसम सामान्य से अधिक गर्म रहे। सर्दियों में 1.17 डिग्री सेल्सियस की रिकॉर्ड तोड़ विसंगति देखी गई, जो 1901 यानी 124 वर्ष बाद सबसे अधिक वृद्धि को दर्शाता है।

यह चिंताजनक तस्वीर पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनेंट (सीएसई) की ओर से जारी रिपोर्ट में सामने आई है। जून से सितंबर का समय सामान्य से थोड़ा अधिक गर्म (0.09 डिग्री) रहा और अक्तूबर से दिसंबर में तापमान सामान्य से थोड़ा कम (0.10 डिग्री) रहा। 2025 में 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 में 24 घंटे के अधिकतम तापमान ने औसत मासिक उच्चतम तापमान ने 124 साल का रिकॉर्ड तोड़ा। वहीं, 21 राज्यों में 124 वर्ष बाद मासिक 24 घंटे की सर्वाधिक वर्षा का रिकॉर्ड भी टूटा। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2025 में भारत 99% दिनों तक किसी न किसी रूप में चरम मौसम की घटनाओं का गवाह बना। इसके कारण न केवल 4,421 लोगों को जान गंवानी पड़ी बल्कि 1.74 करोड़ हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा।

आंकड़े बताते हैं कि वायु प्रदूषण भी अधिक जानलेवा हो रहा है। यही नहीं, देश में हर आठ में से एक नागरिक किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त है। चरम मौसमी घटनाएं देश में अब अपवाद नहीं, बल्कि रोजमर्रा की वास्तविकता बनती जा रही हैं, जिसका सीधा असर लोगों की जान, आजीविका और कृषि पर पड़ रहा है। फरवरी 2026 में पहली बार देश में एक भी शीतलहर दर्ज नहीं की गई। वहीं, पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश को मार्च 2026 की शुरुआत में ही गंभीर हीटवेव का सामना करना पड़ा, जो बदलते जलवायु पैटर्न का स्पष्ट संकेत है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च-अप्रैल किसानों के लिए जोखिम वाले महीने बनते जा रहे हैं। इनमें तापमान बढ़ रहा है, नमी और बारिश अधिक हो रही है और ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का दायरा भी फैल रहा है, जिससे फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। सीएसई और डाउन टू अर्थ ने सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से तैयार रिपोर्ट में ठोस कदम न उठाने पर भयावह नतीजे की चेतावनी दी है। सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा, आंकड़ों जो तस्वीर सामने लाते हैं, उससे आगे की कार्रवाई की दिशा तय होती है।

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