केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की। केंद्रीय विधि मंत्रालय ने सोमवार सुबह जारी अधिसूचना में बताया कि वरिष्ठ वकील वी मोहना, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

नियुक्त किए गए न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। न्यायमूर्ति शील नागू पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। वहीं, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। इन नियुक्तियों से संबंधित अधिसूचनाएं विधि मंत्रालय द्वारा सोमवार सुबह जारी की गईं।
ये भी पढ़ें: ‘गलती CBSE की, सजा बच्चों को’: री-इवैल्यूएशन फीस पर राहुल गांधी का हमला, कहा- इससे कमाई कर रही है सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने की थी किन नामों की सिफारिश?
27 मई को शीर्ष कोर्ट की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 22 मई और 27 मई को बैठकें कीं। कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायाधीश के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण पाली और वरिष्ठ वकील वी मोहन को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी।
शीर्ष अदालत में बदली न्यायमूर्तियों की संख्या
सर्वोच्च न्यायालय में वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश सहित 32 न्यायाधीश कार्यरत हैं। शीर्ष अदालत के दो मौजूदा न्यायाधीश अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वर्तमान में न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना सर्वोच्च न्यायालय में एकमात्र महिला न्यायाधीश हैं। वी मोहन की नियुक्ति से पीठ में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। हाल ही में सरकार ने अध्यादेश जारी कर सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का फैसला किया है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं।
जजों की संख्या बढ़कर हुई 37
शीर्ष अदालत में हालिया नियुक्तियों के बाद न्यायमूर्तियों की संख्या फिलहाल 37 हो जाएगी। हालांकि, इस महीने दो मौजूदा न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होते ही यह संख्या 35 हो जाएगी। कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में सबसे चौंकाने वाला फैसला वरिष्ठ महिला वकील वी मोहना की न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति को माना जा रहा है।
कानूनविदों का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से अदालती कार्यवाही में तेजी आएगी। इसके साथ ही देश के नागरिकों को न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा।
ये भी पढ़ें: बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार: 35 मंत्री आज लेंगे शपथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु ने अपनी कैबिनेट में किन्हें जगह दी?
लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी मदद
सुप्रीम कोर्ट में पिछले कुछ समय से मुकदमों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए लंबे समय से जजों की संख्या बढ़ाने की मांग की जा रही थी। इस अध्यादेश के माध्यम से सरकार ने न्याय व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है। जजों के चार नए पद जुड़ने से अब बड़ी संवैधानिक पीठों का गठन आसानी से हो सकेगा। इसके साथ ही नियमित मामलों की सुनवाई की गति भी तेज होगी।

