केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यानी विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। नई दरें एक जून से प्रभावी होंगी। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स को आधा कर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल पर यह कर घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
अधिसूचना में कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क एवं अवसंरचना उपकर (रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस) शून्य रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए निकाले जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इसी महीने बढ़ाया था विंडफॉल टैक्स
पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) 16 मई को 3 रुपये प्रति लीटर लगाया गया था। पखवाड़ा समीक्षा के बाद इसे 1 जून से घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल के निर्यात पर शुल्क 16.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह एटीएफ पर शुल्क 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
सरकार ने 26 मार्च को डीजल के निर्यात पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क लगाया था। 11 अप्रैल की समीक्षा में इन्हें बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।
इसके बाद 30 अप्रैल की समीक्षा में इन्हें घटाकर 23 रुपये और 33 रुपये प्रति लीटर किया गया। 16 मई को शुल्क और कम कर क्रमशः 16.5 रुपये और 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। सरकार ने पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच देश में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह विंडफॉल टैक्स लगाया था।
फैसले पर क्या बोली सरकार?
इसका उद्देश्य यह भी था कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण निर्यातक मूल्य अंतर का अनुचित लाभ न उठा सकें। 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे, जिसके बाद तेहरान की ओर से जवाबी कार्रवाई शुरू हुई।
युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि पिछले एक सप्ताह से यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट की पृष्ठभूमि में पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए यह विंडफॉल टैक्स लगाया गया था।

